डिजिटल दौर में चाइल्ड ट्रैफिकिंग का तरीका बदला, इरादा नहीं
धनबाद। डिजिटल दौर में चाइल्ड ट्रैफिकिंग के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी नौकरी, मॉडलिंग, स्कॉलरशिप और अन्य आकर्षक ऑफर के माध्यम से बच्चों को झांसे में लेकर तस्करी के जाल में फंसाने का खतरा बढ़ रहा है। झारखण्ड ग्रामीण विकास ट्रस्ट के निदेशक शंकर रवानी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा अब केवल घर और स्कूल तक सीमित नहीं रह सकती। डिजिटल दुनिया में बच्चों को साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन व्यवहार के प्रति जागरूक करना जरूरी है। अपराधी फर्जी प्रोफाइल बनाकर बच्चों से दोस्ती करते हैं और नौकरी या बेहतर भविष्य का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसा सकते हैं।श्री रवानी ने अभिभावकों से बच्चों के साथ दोस्ताना संबंध बनाने और खुलकर बातचीत करने की अपील की, ताकि बच्चे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी बिना डर के दे सकें।उन्होंने कहा कि बाल तस्करी रोकने के लिए पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, आंगनबाड़ी, किशोरी एवं महिला समूह, पुलिस-प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। बच्चों के अचानक स्कूल छोड़ने, गायब होने या नौकरी के नाम पर कहीं ले जाए जाने की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखण्ड ग्रामीण विकास ट्रस्ट बाल संरक्षण, बाल विवाह एवं बाल तस्करी की रोकथाम तथा शिक्षा और किशोरी सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। डिजिटल युग में तस्करी के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के लिए हमारी सजगता और सामूहिक जिम्मेदारी कमजोर नहीं होनी चाहिए।



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