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असर्फी अस्पताल में 650 ग्राम के अति गंभीर प्रीमैच्योर शिशु को मिली जिंदगी,*25 सप्ताह में हुआ अचानक प्रसव, कई बार रुका दिल; पांच महीने की NICU देखभाल के बाद स्वस्थ




धनबाद। महज 25 सप्ताह यानी छह महीने से भी कम गर्भावधि** में अचानक जन्मे एक अति गंभीर प्रीमैच्योर शिशु ने पांच महीने की गहन चिकित्सा देखभाल के बाद जिंदगी की कठिन जंग पार कर ली। जन्म के समय शिशु का वजन करीब **800 ग्राम** था, जो उपचार के दौरान घटकर लगभग **600 ग्राम** तक पहुंच गया। कई गंभीर चुनौतियों के बावजूद असर्फी हॉस्पिटल की NICU टीम के निरंतर प्रयास और विशेषज्ञ देखभाल से अब शिशु स्वस्थ है, अच्छी तरह दूध पी रहा है और उसका वजन लगातार बढ़ रहा है। शिशु का जन्म 25 सप्ताह की गर्भावस्था में अचानक प्रसव के बाद हुआ था। इतनी कम गर्भावधि और अत्यंत कम वजन के कारण जन्म के समय उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु का **हृदय तीन से चार बार रुक गया**। प्रत्येक बार चिकित्सकीय टीम ने तत्काल **CPR (Cardiopulmonary Resuscitation)** देकर शिशु को पुनर्जीवित किया। लगातार निगरानी, समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और टीम की कड़ी मेहनत के साथ परिवार के विश्वास ने उपचार की इस लंबी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिशु के उपचार का नेतृत्व **असर्फी हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी विभाग के HOD डॉ. किशोर गांधी** ने किया। अत्यंत कम वजन और गंभीर स्थिति वाले इस शिशु को लगभग **पांच महीने तक NICU में विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी और उपचार** दिया गया। इस पूरी चिकित्सा यात्रा में **स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. भाव्या गायत्री** का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रसव की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से लेकर जन्म के बाद शिशु की लगातार देखभाल तक, संबंधित चिकित्सकीय टीम ने समन्वित रूप से उपचार किया।शिशु की वर्तमान स्थिति चिकित्सकीय दृष्टि से भी संतोषजनक है। वह **अच्छी तरह दूध पी रहा है, उसका वजन बढ़ रहा है और न्यूरोलॉजिकल स्थिति भी सामान्य एवं संतोषजनक है।** पांच महीने की लंबी NICU देखभाल के बाद शिशु अब अपने माता-पिता के साथ है।इस अवसर पर असर्फी हॉस्पिटल के **MD श्री उदय प्रताप सिंह** एवं **President (Growth & Development) श्री सुभांशु रॉय** भी उपस्थित रहे। डॉ. किशोर गांधी ने बताया कि अत्यंत कम गर्भावधि और कम वजन वाले प्रीमैच्योर शिशुओं की देखभाल अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में लगातार निगरानी, समय पर हस्तक्षेप, विशेषज्ञ नियोनेटोलॉजी देखभाल और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। इस शिशु के मामले में उपचार के दौरान कई गंभीर परिस्थितियां आईं, लेकिन चिकित्सकीय टीम ने हर चुनौती का तत्काल सामना किया।


राजनंदिनी और उनके परिवार के लिए पांच महीने की यह यात्रा चिंता, संघर्ष और उम्मीद से भरी रही। आज जब उनका शिशु अच्छी तरह दूध पी रहा है, वजन बढ़ा रहा है और स्वस्थ अवस्था में उनके साथ है, तो यह उनके लिए बेहद भावुक और राहत भरा क्षण है।

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