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पर्युषण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई,पंडित मुन्ना लालजी ने बताया कि कामसेवन का मन से, वचन से तथा शरीर से परित्याग करके अपने आत्मा में रमना ब्रह्मचर्य है


Dhanbad: पर्युषण पर्व के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई। पंडित मुन्ना लालजी ने बताया कि कामसेवन का मन से, वचन से तथा शरीर से परित्याग करके अपने आत्मा में रमना ब्रह्मचर्य है। संसार में समस्त वासनाओं में तीव्र और दुद्र्वर्ष कामवासना है। इसी कारण अन्य इन्द्रियों का दमन करना तो बहुत सरल है किन्तु कामवासना की साधन भूत काम इन्द्रिय का वश में करना बहुत कठिन है। नित्य दिन की तरह प्रात भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन का कार्यक्रम हुआ। आज के शांतिधारा के पुण्यार्जक सुरेंद्र कुसुम जैन,आकाश अंशी जैन, महावीर मयंक बाकलीवाल और संतोष पंकज जैन थे।


  आज 12 वें तीर्थंकर बासुपूज्य भगवान का का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया जिसमें समाज के सभी लोगों ने निर्वाण लाडू चढ़या ।आज संध्या 4 बजे 1008 शांतिनाथ भगवान की अभिषेक और शांति धारा की गई । आज इस कार्यक्रम में विजय गोधा, संजय गोधा,चक्रेश जैन, सुशील बाकलीवाल, रजत जैन, आकाश जैन, मनीष झाँझरी, मयंक बाकलीवाल, राखी जैन, कामना जैन, रिद्धि गोधा, रेशु जैन आदि ने भाग लिया।




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