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आज दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप की अराधना हुई, घर-परिवार छोड़ कर जंगलों में जाना तप नहीं है परन्तु तप या तपस्या के असली मायने हैं ज़िन्दगी को बहुत आसानी से जीना


धनबाद। आज दशलक्षण पर्व के सातवां दिन उत्तम तप हैआज प्रातः 7 बजे अभिषेक एवं शांति धारा सम्पन्न हुआ आज के पुण्यार्जक सुशील बाकलीवाल, पंकज जैन, सुशील जैन, एकलव्य जैन थे ।इसके बाद दशलक्षण धर्म की पूजा हुई जिसमें तप धर्म की विशेष पूजा हुई।तप शब्द सुनने से परंपरागत भ्रम हमारे मन में बैठा हुआ है कि तप के मायने हैं बहुत कठिनाई का जीवन जीना । परन्तु तप या तपस्या के असली मायने हैं ज़िन्दगी को बहुत आसानी से जीना ।घर-परिवार छोड़ कर जंगलों में जाना तप नहीं है। 

तप है तपना, प्रयास करना, मेहनत करना। एक बच्चा जो परीक्षा की तैयारी कर रहा है, वह भी तप है। एक मां जो रात-रात भर जाग कर अपने बीमार बच्चे की सेवा कर रही है, वह भी तप है। देश का हर नागरिक जो अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करता है, वह तप करता है। वाणी का तप है - हमेशा मधुर वचन बोलना, प्रेम से भरकर बोलना, सत्य वचन बोलना, हमेशा जिनेन्द्र भगवान् के कहे वचनों को दोहराते रहना । मन का तप है - हमेशा मन में अच्छे विचार करना या रखना, मन की प्रसन्नता बनी रहे इस बात का ध्यान रखना। आज के कार्यक्रम में चक्रेश जैन, रजत जैन, मनीष झांझरी, अमित जैन, मुकेश गंगवाल ,नीलम गोधा , शिल्पा  जैन, ईशु जैन, पायल जैन , सृष्टि जैन , रेशू जैन ,नेहा जैन आदि भाग लिया ।

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