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पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की हुई पूजा, प्रमोद जैन ने कहा की किसी से कपट न करना या मन की सरलता को आर्जव कहते हैं

 


Dhanbad: पर्युषण पर्व के तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म की मंदिर के नीचे तल और ऊपर तल में भगवान की अभिषेक और शांतिधारा की गई । इसके बाद दशलक्षण की पूजा की गई जिसमें आज आर्जव धर्म की पूजा की गई । जैन समाज के प्रमोद जैन ने बताया की आर्जव शब्द का अर्थ सीधापन,  सुगमता, सरलता, स्पष्टवादिता, ईमानदारी है। किसी से कपट न करना या मन की सरलता को आर्जव कहते हैं।विनम्रता से सरलता आती है तथा सरलता से निष्कपटता की वृत्ति विकसित होती है। जिस व्यक्ति के हृदय में कपट एवं कुटिलता होती है उसकी दृष्टि आविष्ट, आविल एवं मलिन होती है। उसका जीवन कृत्रिम एवं असामाजिक बन जाता है। ‘आर्जव’ आत्म-संशोधन की भूमिका का निर्माण करता है, आज के कार्यक्रम में संजय गोधा, अक्षत जैन, मुकेश जैन, विशाल जैन,चक्रेश जैन , सजल जैन, वरुण जैन,शिल्पा जैन, उर्मिला गोधा एवं अन्य मौजूद थे।




 

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