Dhanbad: पर्युषण पर्व के दशलक्षण में छठे दिन उत्तम संयम धर्म के साथ ही धूपदशमी मनाई गई। सबसे पहले भगवान का अभिषेक किया गया, फिर शांतिधारा की गई । आज के पुण्यार्जक पप्पन नमन जैन और मनीष झांझरी बने। सामाज के प्रमोद जैन ने बताया की संयम धर्म में इंद्रिय को वश में रखना शामिल है। इंद्रिय संयम है स्पर्श, रसना, घ्राण,चक्षु और कर्ण ये पांच इंद्रियां हैं। इन इंद्रियों के विषयों में आसक्त हुआ यह मोही प्राणी अपने स्वभाव को भूल रहा है। अपनी ही अज्ञानता का परिणाम है कि सामर्थ्य शक्तिवान होते हुए भी इनका दास बना हुआ है। स्पर्श इंद्रिय के वशीभूत हुआ हाथी कृत्रिम हथिनी की चाह में अपने को गड्ढे में गिरा देता है। रसना, मछली का जीवन छीन लेती है। गंधलोलुपी भ्रमर कमल पत्रों में दबकर मर जाता है।अच्छा-अच्छा स्वाद लेना, गंध लेना, मनोहर रूप, आकृतियां देखना तथा कर्णप्रिय गीत-संगीत सुनना, इन्हीं विषयों की पूर्ति में जीवन लगा है, मन रमा है इसी में। असल में इन सबका रस लेने वाला तो मन ही है। मन के इशारे पर ही इंद्रियाँ प्रवृत्ति करती हैं। अत मन को भी संयत बनाना जरूरी है। मोह की मदिरा पीने वाला यह मन अनेक अनर्थ कराता ही है। अत मन की इस प्रवृत्ति को समझकर हम इसके मालिक बनें, गुलाम नहीं। इसकी दासता से मुक्त होकर इंद्रिय विजेता बनें तभी सच्चे जैन और जिन बन पाएंगे।जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धारण कर लिया है, उसका मनुष्य जीवन सार्थक है तथा सफल है। बगैर संयम के मुक्तिवधू कोसों दूर है एवं 'आकाशकुसुम' के समान है। धूपदशमी पर आज समाज के सभी पुरुष और महिलाएं संध्या 4 बजे धैया जैन मंदिर पहुंचे और प्रभु के सामने गर्म अंगीठी में मंत्रोच्चार के साथ धूप डालकर कर मन और वातावरण में शुद्धि की याचना किया ।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर चक्रेश जैन, संजय गोधा, पप्पन जैन, मनीष झांझरी, बिनोद गोधा ,मुकेश गंगवाल, वरुण गोधा, राखी जैन, अंशी जैन, साधना जैन, उर्मिलागोधा, संतोष देवी, भगवती देवी आदि उपस्थित थे।
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