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रचित अग्रवाल ने हिंदी साहित्य विकास के मंच पर बिखेरा अपना जलवा, कैलाश खेर ने बताया कोयलांचल का कोहिनूर


Dhanbad। पद्मश्री विभूषित और देश के विख्यात सूफी गायक कैलाश खेर को उनके चाहने वालों ने कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूर पर स्थित होटल लक्ससेज इन में घेर लिया। इस बीच वे कार्यक्रम स्थल पर लगभग 1 घंटा विलंब से पहुंचे। इस दौरान धनबाद के लाल और वॉइस ऑफ इंडिया फेम रचित अग्रवाल ने मंच संभाला और दर्शकों को एक से बढ़कर एक गाने सुना कर उत्साहित कर दिया। उन्होंने आज मेरा जी करदा, तू मेरा कोई न होके भी कुछ लगे,,केसरिया तेरा इश्क है पिया एक पल चैन नहीं...... गाकर गोल्फ ग्राउंड के मंच पर उपस्थित दर्शको को मदहोश कर दिया। अपने होमटाउन में अपने माता-पिता और चाहने वालों के बीच अपनी गायकी का जलवा बिखरने वाले रचित अग्रवाल भावुक होते हुए अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता अपने गुरु मुन्ना भैया और कैलाश खेर को दिया। उन्होंने उन्होंने बताया कि कैलाश खेर युवाओं के लिए हमेशा आगे रहते हैं और अपने जन्मदिन 7 जुलाई को वे मुंबई में नई उड़ान कार्यक्रम का आयोजन कर नए-नए कलाकारों को मौका देते हैं। उनकी हर बात को बारीकी से लेते हुए अपनी कला को निखारा है उन्होंने मंच प्रदान करने के लिए हिंदी साहित्य विकास परिषद के सचिव राकेश शर्मा को भी धन्यवाद दिया। 


मंच से रचित अग्रवाल की प्रतिभा को सराहा

कैलाश खेर ने अपने मुफलसी के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि वे छोटे से गांव से निकलकर माया नगरी पहुंचे है, पद्मश्री मिलने के बाद उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली है। उन्होंने रचित अग्रवाल की प्रशंसा करते हुए कहा , रचित को खूब मान सम्मान दे ताकि रचित जब आगे बढ़कर एक बड़ा कलाकार बने तो आप गर्व से कह सके यह हमारे कोयलांचल का लाल है।



 


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