Dhanbad। आज दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप की आराधना हुई। आज प्रात अभिषेक एवं शांति धारा सम्पन्न हुआ। आज के पुण्यार्जक विनोद गोधा और संतोष जैन थे। इसके बाद दशलक्षण धर्म की पूजा हुई जिसमें तप धर्म की विशेष पूजा हुई। तप शब्द सुनने से परंपरागत भ्रम हमारे मन में बैठा हुआ है कि तप के मायने हैं बहुत कठिनाई का जीवन जीना । परन्तु तप या तपस्या के असली मायने हैं ज़िन्दगी को बहुत आसानी से जीना ।हमारा जीवन इच्छाओं का "अक्षय पात्र" है और उनको पूरा करने के लिए हम अपने जीवन में कितनी मुश्किलें खड़ी कर लेते हैं । संसार में बिना तप के कुछ नहीं मिलता और ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे तप से प्राप्त न किया जा सके । घर-परिवार छोड़ कर जंगलों में जाना तप नहीं है। तप का लक्ष्य कर्मक्षय एवं इच्छाओं का विरोध है । इस लक्ष्य के साथ जो अन्तरंग और बहिरंग प्रकार से तपस्या करता है वह कर्मो की निर्जरा करने में भी समर्थ होता है। नाम, ख्याति या व्यक्तिगत लाभ के लिए किया तप पतन की और ले जाने वाला है । तप है तपना, प्रयास करना, मेहनत करना। एक बच्चा जो परीक्षा की तैयारी कर रहा है, वह भी तप है। एक मां जो रात-रात भर जाग कर अपने बीमार बच्चे की सेवा कर रही है, वह भी तप है। देश का हर नागरिक जो अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करता है, वह तप करता है। जब भी हम अपने लक्ष्य पर चलते हैं, तो रास्ते में प्रलोभन आते हैं। उन प्रलोभनों में अधिकतर फिसल जाते हैं, परंतु जो उनमें अपने आप को स्थिर रखता है, वह स्थितप्रज्ञ है। वह योगी है। असल में वही तपस्वी है। तन, मन और बुद्धि का तप ही हमको फर्श से अर्श तक ले जाता है। विनय परम तप है। वाणी का तप, मन का तप, शरीर का तप करते रहना चाहिए । शरीर से झुकना, भगवान् की पूजा करना, गुरुजनों का सम्मान करना - ये शरीर के तप है । वाणी का तप है - हमेशा मधुर वचन बोलना, प्रेम से भरकर बोलना, सत्य वचन बोलना, हमेशा जिनेन्द्र भगवान् के कहे वचनों को दोहराते रहना । मन का तप है - हमेशा मन में अच्छे विचार करना या रखना, मन की प्रसन्नता बनी रहे इस बात का ध्यान रखना। कर्मों का क्षय करना ही तप है, ऐसे अच्छे भाव, अच्छे गुण, अच्छी बातों को अपने जीवन में अंगीकार करना जिससे की हमारे कार्यो का क्षरण शीघ्रता से होने लगे वही वास्तिवक तप हुआ करता है।
ये रहे मौजूद
आज के कार्यक्रम में चक्रेश जैन, रजत जैन, मनीष झांझरी, विजय गोधा, आकाश जैन , विशाल जैन, सजल जैन,शिल्पा जैन, ईशु जैन, नेहा जैन आदि भाग लिया ।



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