Dhanbad। संत अंथोनी चर्च धनबाद में अन्तिम ब्यारी (Last supper) अर्थात पुण्य बृहस्पतिवार के अवसर पर चर्च के फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने चुने हुए 12 लोगों के पैर धोए। प्रभु यीशु ने अपने मृत्यु के एक दिन पूर्व अंतिम भोज का आयोजन किया था। अंतिम भोजन अर्थात पहला प्रभु भोज के पूर्व प्रभु यीशु ने अपने कपड़े उतार कर कमर में ऑगोछा बांध अपने 12 शिष्यों के पैर धोए। इसी स्मृति में चर्च के फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने कहा कि, हमें चाहिए कि दिन प्रतिदिन के जीवन में हम प्रभु यीशु के प्रति अपनी भक्ति को बढा़ते रहें। आज ही के दिन प्रभु यीशु ने 12 चेलों के पैर धोए थे और पड़ोसी प्रेम का अनमोल उदाहरण प्रस्तुत किया था।
प्रभु यीशु जब अपने चेलों के पैर धोने को हुए तो सभी संकोच करने लगे। इस पर प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से कहा तुम मुझे गुरु और प्रभु कहते हो, ठीक कहते हो। मैं वही हूं इसलिए यदि मैं प्रभु और गुरु होकर भी तुम्हारे पैर धोता हूं तो तुम भी वैसा ही किया करो। यह किसी के प्रति अपने प्रेम का सबसे बड़ा प्रमाण है। इसी विशेष घटना के स्मरण में चुने हुए 12 लोगों के पैर फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो द्वारा धोए गए। इस वर्ष चुने गए 12 लोगों में विशेष कर पुलिस कर्मियों को स्थान दिया गया। जो की समाज में एक विशेष सेवा प्रदान करते हैं। 12 चुने हुए लोगों में विलियम पन्ना, मनोज टोप्पो, परमानंद कुजूर, सुषमा टोप्पो, अनीता तिर्की, शीला सोरेन, रश्मि लकड़ा, माइकल डायमंड, नॉर्मल कैरी, सीमा कुमारी, बसंती मिंज तथा जॉन कैंप शामिल थे के पैर धोए।आज पूर्ण बृहस्पतिवार के उपलक्ष मे प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने कहा- पासका रहस्य के तीन दिवसीय समारोह कार्यक्रम के आज प्रथम दिवस में पुण्य बृहस्पतिवार की प्रार्थना सभा में हम सभी यहां उपस्थित हुए हैं। आज विशेष कर हम उस दिन को याद करते हैं जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों के साथ आखिरी भोजन किया था। आज से लेकर अगले तीन दिनों तक प्रभु यीशु के जीवन के अंतिम आत्मिक समय थे। जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा कहा और ऐसा किया जो आगे युगों युगांतर तक बना रहेगा। और जो उदाहरण उन्होंने अंतिम भोजन के समय पेश किया उसी का अनुसरण हम आज भी करते आ रहे हैं। आज ही के दिन भोजन से पहले प्रभु यीशु ने अपने 12 चेलों के पैर धोकर पड़ोसी प्रेम तथा अपने अनंत प्रेम का उदाहरण पूरी मानव जाति के सामने रखा था। उन दिनों में घर में आए मेहमानों का स्वागत उनके पैर धोकर किए जाते थे। लेकिन पैर धोने का काम घर का मालिक नहीं किंतु सेवक का होता था। इसके ठीक विपरीत प्रभु यीशु ने स्वयं प्रभु होकर भी एक दास की तरह अपने चेलों के पैर धोए और पुरानी चली आ रही प्रथा को तोड़ दिया। उस दिन से लेकर आज तक हर पुण्य बृहस्पतिवार के समय में पूरी दुनिया में प्रभु यीशु द्वारा रखी गई इसी व्यवस्था को दोहराई जाती है। यह हमारे क्रिश्चियन जीवन का केंद्र है। यही हम सबको आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रखता है एवं नया जीवन देता है। यह हमें दुख तकलीफों को सहने एवं उनसे ऊपर उठने का साहस देता है एवं हमें अपने विश्वास में मजबूत बनाता है। यीशु ख्रीस्त हर उस जगह विद्यमान होते हैं जहां कलीसिया एक साथ जमा होती है,भजन गाती है एवं प्रार्थना करती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिशिर प्रभात तिर्की, इतवार टूटी, हरमन बिल प्रवीण लोंमगा आदि की सराहनीय भूमिका रही।



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