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सिंबायोसिस किड्स स्कूल में गुरुदेव की 165वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा, उत्साह एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाई गई




Dhanbad। सिंबायोसिस किड्स स्कूल में गुरुदेव  की 165वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा, उत्साह एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का वातावरण पूरी तरह साहित्य, संस्कृति और संगीत की मधुर भावना से ओत-प्रोत हो उठा। कार्यक्रम में कक्षा पाँचवीं, छठी एवं आठवीं के छात्र-छात्राओं ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन, साहित्य, शिक्षा एवं मानवता के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। विद्यार्थियों ने बताया कि गुरुदेव केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षाविद्, दार्शनिक, संगीतकार एवं मानवतावादी चिंतक भी थे, जिनके विचार आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। प्रथम वर्ग के नन्हे बच्चों ने सुंदर बांग्ला कविता प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। वहीं छात्र-छात्राओं ने रवींद्र संगीत पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और भी भावपूर्ण एवं यादगार बना दिया। उनकी मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती रीना मंडल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के आदर्श, विचार एवं शिक्षा दर्शन आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन करना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है।विद्यालय की बांग्ला शिक्षिका जौली मुखर्जी ने विद्यार्थियों को गुरुदेव के अनुशासन, सृजनशीलता एवं नैतिक मूल्यों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। वहीं शिक्षिका आरती साह ने कहा कि टैगोर का साहित्य समाज में सकारात्मक चेतना, संवेदनशीलता एवं मानवता का संचार करता है।


इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे तथा पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया।

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