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टुंडी के जाताखुंटी पंचायत के ग्रामीण नदी किनारे गड्ढा खोदकर पानी पीने को मजबूर

 






धनबाद : जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित पश्चिमी टुण्डी के जाताखुंटी पंचायत के अंतर्गत चरककला , कुरहवा, ढोंगाबेड़ा, मोहली एवं कोलहरिया सहित अन्य आधा दर्जन टोलों की आबादी स्वतंत्रता के उपरान्त से ही ये सभी नदी किनारे गड्ढा खोदकर पानी लेने के लिए मजबूर है। गांव में भू-जल स्तर, विशेष कर गर्मी के मौसम में इतना गिर जाता है कि वहां लगे 4 चापाकल / हैंड पम्प फेल हो जाते हैं। झारखंड बनने के बाद 24 साल होने को चला लेकिन वहां के स्थानीय अभी भी नदी किनारे गड्ढा (चुआं ) खोदकर ही खाना बनाने एवं पीने का पानी संग्रह करने को मजबूर  हैं।गांव की महिलाएं भीषण गर्मी में  नगरवा जोड़िया के निचले हिस्से में बालू खोदकर गड्ढे से पानी भरकर घर ले जाती है या फिर थोड़ा सा अच्छा पानी संग्रह करने के लिए सूखे हुए कुएं के रिश्ते हुए पानी को संग्रह करने के लिए घंटा इंतजार करना पड़ता है । ढोंगाबेड़ा गांव की ललिता देवी बताती है 12 साल पहले में शादी करके आया तब से मैं इसी तरह से पीने का पानी भर रही हूं, मेरी सास भी इसी तरह से नदी किनारे गड्ढा खोदकर पानी भरती थी।कुरहवा टोला की मुनि भावताइन बताती है, यहां एक ही कुआं है और गर्मी में कुआं सूख जाने के कारण रिश्ता हुआ पानी के लिए घंटा इंतजार करना पड़ता है, पहले दामोदर नदी किनारे बालू खोदकर पानी लेते थे। अभी बालू खत्म हो गया है इस कारण से नगरवा जोड़ियां से बालू खोद कर गड्ढे बनाकर पानी लेते हैं। इन गांवों की प्यास बुझाने के लिए 2016 में शुरू हुई ठेठाटांड़ मेगा जलापूर्ति योजना निर्धारित समयसीमा 2018 में खत्म होने का समय सीमा निर्धारित था। 4 साल बाद भी काम पूरा ना हो सका इसलिए, पाइप बिछाने वाला ठेकेदार 2020 में भाग गया।पश्चिमी टुण्डी के जाताखुंटी पंचायत के मुखिया आशा  मुर्मू से हुई वार्ता के अनुसार कई बार विभाग के अभियंताओं से बातचीत किया, परन्तु उनके कानों में जूं तक नहीं रेंगा और पाइप नहीं बिछा।टुंडी विधायक मथुरा महतो ने कहा टुंडी बराकर नदी के किनारे बसा हुआ है अच्छे पानी के लिए लोग  नदी के किनारे गड्ढा खोदकर पानी निकालते हैं. बहुत सारे जगह में अत्यधिक गर्मी के कारण डीप बोरिंग सफल नहीं है जिसके कारण हर घर जल योजना चलाया गया है जो पूरा होने वाला है।टुंडी में ठेठाटांड़ जलापूर्ति योजना समय सीमा पर पूरा नहीं हो सका इसीलिए ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर भाग गए  90% काम पूरा हो चुका है जिसके कारण टुंडी  के 92 गांव के लोग प्रभावित है ।जुलाई के प्रथम सप्ताह में विधानसभा टीम आने वाली है जल समस्या को लेकर क्षेत्र का निरीक्षण भी किया जाएगा.

क्या थी 46 करोड़ की मेगा जिला पूर्ति योजना?

साल 2016 में झारखंड सरकार ने टुंडी प्रखंड में ठेठाटांड़ मेगा जलापूर्ति योजना लेकर आई। 7 पंचायतों के 92 गांवों में करीब 2 लाख की आबादी को पीने का पानी उपलब्ध कराना था। 46.38 करोड़ रुपए से ट्रीटमेंट प्लांट, 9 जलमीनारें व गांवों में पाइपलाइन बिछानी थी। नवंबर 2018 तक काम पूरा कर लेने का लक्ष्य था। 4 जलमीनारों से जलापूर्ति शुरू हुई, पर बाकी बची पाइपलाइन का काम अधूरा रह गया। 2020 में ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर भाग गए.



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