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डॉ. जे. के. सिन्हा मेमोरियल इंटरनेशनल स्कूल ऑफ़ लर्निंग में (धनबाद) दो दिवसीय शिक्षक संवर्धन कार्यशाला संपन्न


धनबाद।  डॉ.  जे. के. सिंहा मेमोरियल इंटरनेशनल स्कूल ऑफ लर्निंग, धनबाद के प्रांगण में दो दिवसीय शिक्षक संवर्धन कार्यशाला संपन्न हुआ। दिनांक १४ जून, प्रथम दिवस  कार्यशाला में  संचिता श्रीवास्तव द्वारा प्रभावशाली कक्षा प्रबंधन को लेकर नई-नई जानकारियां दी गई उन्होंने बताया कि कक्षा प्रबंधन का सबसे प्रमुख कार्य है समय को ध्यान में रखकर छात्रों को रुचि पूर्ण शिक्षक देना तथा छात्रों की समझ को देखकर विषय का वर्णन करना चाहिए। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि अधिगम सकारात्मक होनी चाहिए, बच्चों को समय समय पर समूह में परियोजना कार्य देनी चाहिए ताकि वह अपने विचारों का आदान- प्रदान करते हुए समूह में रहना सीखें। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले विद्यालय की संस्थापक डॉ शोभा सिन्हा एवं प्राचार्य डॉ. बी. जगदीश राव द्वारा संयुक्त  रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। तत्पश्यात रिसोर्स पर्सन संचिता श्रीवास्तव को तुलसी पौधे एवं अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित किया गया। डॉ शोभा सिन्हा द्वारा कार्यशाला के आयोजन की आवश्यकता पर अपनी राय रखते हुए कहा गया कि इस तरह के नियमित आयोजन से शिक्षकों को हर समय नया सीखने को मिलता हैं जिसका लाभ उठाते हुए सभी शिक्षकों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका प्रज्ञा शुक्ला एवं धन्यवाद ज्ञापन उप प्राचार्य श्रीमती सुतापा सेनगुप्ता द्वारा किया गया।    कार्यक्रम के दूसरे दिन शिक्षा की प्रक्रिया में आध्यात्मिकता को शामिल करने की आवश्यकता है शीर्षक पर कार्यशाला का आयोजन दिनांक १५ ०६ २४ को किया गया। जिसमे मास्टर इन कंप्यूटर साइंस से पढ़ाई कर विप्रो जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर मैनेजर जैसे पद पर कार्य करने के पश्चात् इस्कॉन धनबाद के एच. जी. सुंदर गोविंद प्रभु जी द्वारा गीता के श्लोकों का वर्तमान शिक्षा प्रणाली में में शिक्षकों की नैतिकता एवं कर्तव्यनिष्ठा पर अपनी सारगर्भित बातें रखी। सुंदर गोविंद प्रभु जी ने बड़े ही सरल शब्दों में बताया कि धर्म, आध्यात्मिकता, जीवन और जीविका में अंतर आदि को स्पष्ट करते हुए बताया कि सच्ची निष्ठा एवं नेक नियति के साथ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना शिक्षक का परम धर्म है उन्होंने जीवन में व्यवहार का महत्व और वाणी की कोमलता की अहमियत को भी दर्शाया।  अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने बताया किन एक सच्चे शिक्षक में पवित्र जीवन और अच्छा चरित्र गुणों का होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि शिक्षा की प्रक्रिया में आध्यात्मिकता को शामिल करने के लिए गुरु - शिष्य का संबंध अनुशासन पूर्ण होना चाहिए। शिक्षकों में सेवा - भाव एवं विद्यार्थियों में कृतज्ञता का भाव आवश्यक हैं। 



इससे पूर्व विषय प्रवेश पर अपनी बात रखते हुए प्राचार्य डॉ बी जगदीश राव ने बताया कि आज के वर्तमान परिस्थिति में शिक्षकों का कार्य महत्वपूर्ण एवं चुनौती भरा हो गया है। समाज में एक ओर जहां शिक्षा को प्रोडक्ट की तरह परोसा जा रहा हैं परिणामस्वरूप शिक्षकों की गरिमा ख़त्म होते जा रही है ऐसी स्थिति में यह जरुरी है कि हम शिक्षा में अध्यात्म के साथ मिलाये जिससे बच्चों में सार्थक शिक्षा एवं सही संस्कार का संवर्धन हो पायेगा। कार्यक्रम का सञ्चालन शिक्षिका स्निग्धा मिश्रा एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती गायत्री आचार्या द्वारा किया गया।

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