धनबाद - व्यक्तिगत जीवन में साधना करने से अंतरात्मा में रामराज्य की स्थापना होगी; परंतु सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में रामराज्य की स्थापना के लिए हमें अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अराजकता के विरुद्ध लड़ना होगा। हमारे विचार और व्यवहार हिंदू संस्कृति के अनुकूल होने चाहिए। 'हैलो' नहीं, बल्कि नमस्कार या 'राम-राम' कहना, यह हमारी संस्कृति है; 'टीवी' पर धारावाहिक देखना नहीं, बल्कि 'कीर्तन-भजन' देखना, यह हमारी संस्कृति है; कोई अभिनेता नहीं, बल्कि राम-कृष्ण हमारे संस्कृति द्वारा दिए गए आदर्श हैं। हमारे आचरण और व्यवहार में हम संस्कृति की रक्षा करें। धर्म का पालन करें, ऐसा आवाहन हिंदू जनजागृति समिति की कुमारी कनक भारद्वाज ने किया।
धनबाद के राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ । देशभर में 71 स्थानों पर 'गुरु पूर्णिमा महोत्सव' मनाया गया । इस कार्यक्रम में तरुण हिंदू, इस संगठन के संस्थापक डॉ. नील माधव दास जी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि गुरु निंदा एवं गुरु की अवज्ञा नहीं करनी चाहिए लेकिन गुरु बनाने से पूर्व ये सुनिश्चित करें की गुरु खरे हों। खरे गुरु के 4 गुण होते हैं - जिनको वेद, उपनिषद का ज्ञान है, सिद्ध पुरुष हैं और साधना भी करते हैं। उनके पास सामर्थ्य हो की वो अपना ज्ञान शिष्य को दान कर सकें। मन का आनंद ही मनुष्य का उद्देश्य होता है। लेकिन षडरीपु रूपी शत्रु हमें आनंद प्राप्ति से रोकते हैं। इनको दूर करने के लिए हमें साधना करनी आवश्यक है। रामराज्य अभी तक क्यों नही आया, या उसे कैसे प्राप्त करें? जब हम रामराज्य के पात्र बनेंगे तभी वो आएगा, इसलिए हमें साधना करनी होगी तथा इसकी जागृति भी समाज में करनी होगी। हमें साधना करके वास्तव में हिंदू बनने की आश्यकता है। ऐसा प्रतिपादन डॉ. नील माधव दास जी ने किया। महोत्सव की शुरुआत श्री व्यासपूजा और प.पू. भक्तराज महाराज की प्रतिमा पूजा से हुई। देश-विदेश के भक्तों को गुरुपूर्णिमा का लाभ मिल सके इसके लिए हिंदू जनजागृति समिति द्वारा कन्नड़ और बंगाली भाषाओं में ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव भी संपन्न हुए। इस माध्यम से देश-विदेश के भक्तों ने ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ का लाभ लिया।

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