धनबाद। स्थानीय होटल में डाबर इण्डिया लिमिटेड एवं आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयुर्वेद चिकित्सक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । जिसमें प्रयागराज से विश्व आयुर्वेद मिशन के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रो.(डॉ.) जी.एस.तोमर ने मुख्य वक्ता के रूप में स्थानीय आयुर्वेद चिकित्सकों के साथ अपने अनुभव साझा किए । इस अवसर पर डॉ जी के गोस्वामी, डॉ ए एस प्रसाद एवं आरोग्य भारती झारखंड प्रांत के संयुक्त सचिव जय प्रकाश नारायण सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने उद्गार प्रकट किए । कार्यक्रम में आरोग्य भारती के डॉ विकास रमन, श्रीमती ममता सिंह, अरुण राय, पी एन सिंह, जय प्रकाश सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, डी एस चौबे, वाय एन ठाकुर एवं अजय सिंह आदि के साथ साथ नगर के लगभग सौ चिकित्सकों की उपस्थित रही। डॉ तोमर ने अपने उद्बोधन में आरोग्य भारती के स्वस्थ व्यक्ति - स्वस्थ परिवार- स्वस्थ गाँव - स्वस्थ राष्ट्र के उद्देश्य पर प्रकाश डाला तथा इसके स्वस्थ जीवनशैली, किशोरी स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, मधुमेह प्रबंधन एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य सहित विविध प्रकल्पों पर विस्तार से चर्चा की । इसके साथ साथ डॉ तोमर ने आयुर्वेद को जीर्ण एवं असाध्य जीवनशैली जन्य रोगों की चिकित्सा में अत्यन्त प्रभावी बताया । उन्होंने कहा कि हर विधा की अपनी अच्छाइयाँ एवं सीमाएँ होती हैं । रोगी को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने जैसे समान उद्देश्य होने से हमें सबका समादर करते हुए प्रतिद्वंद्वी भावना छोड़कर सहयोग की भावना से कार्य करना चाहिए । उन्होंने डायबिटीज़ के नियंत्रण में डाबर बसन्तकुसुमाकर रस के प्रभाव को वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर स्पष्ट करते बताया कि आयुर्वेद का यह रसायन एक ओर इंसुलिन एण्टीबोडी के निर्माण को नियंत्रित करके इंसुलिन की सक्रियता बढ़ाता है वहीं दूसरी ओर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को डायबिटीज़ के घातक उपद्रवों से बचाता है । इसी प्रकार डाबर हीरक भस्म केंसर के रोगियों के जीवन काल को बढ़ाने, उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने एवं कीमोथेरेपी एवं रेडिएसन थेरेपी के घातक उपद्रवों को बचाने में अत्यन्त कारगर है । इसके अलावा गठिया के लिए बृहतवातचिन्तामणि रस, संधिवात में स्वर्ण गुग्गुल, श्वास रोग में श्वासकासचिन्तामणि बहुत प्रभावी है । स्वर्ण प्राशन में प्रयुक्त डाबर स्वर्ण भस्म बालकों में व्याधिक्षमत्व बढ़ाने की अद्वितीय औषधि है । प्रारम्भ में डाबर के क्षेत्रीय प्रबंधक विपिन पारीक ने अतिथियों का स्वागत किया एवं डॉ कुनाल राज आन्नद ने डाबर के स्वर्ण योगों सहित अन्य शास्त्रीय औषधियों के मानक के अनुसार निर्माण पर प्रकाश डाला । संचालन डॉ विकास रमन ने किया । अंत में डाबर के एस ओ अनूप जायसवाल ने कृतज्ञता ज्ञापन किया।




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