दीपक कुमार, सहायक निदेशक, शाखा एमएसएमई डीएफओ, धनबाद ने कार्यक्रम की रूप रेखा के बारे में अवगत कराते हुए बताया कि यह कार्यक्रम, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई चैंपियन्स योजना के एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य, उद्यमियों के बीच राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, एमएसएमई को प्रशिक्षित लीन सलाहकारों की मदद से लीन विनिर्माण उपकरणों का इस्तेमाल करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करना, देश के विभिन्न औद्योगिक क्लस्टर में लागू करना एवं एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना में उपलब्ध वित्तीय सहायता एवं विभिन्न प्रक्रियाओ के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना है। लीन टूल्स इस्तेमाल करके, एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों को प्रौद्योगिकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी ।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विशाल अग्रवाल, अध्यक्ष, जेआरएमए, चिरकुंडा, धनबाद एवं राजीव शर्मा, महासचिव, जीटा, धनबाद मौजूद रहे। जिला उद्योग केन्द्र, धनबाद से श्री आदित्य चौधरी, इओडीबी प्रबंधक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों ने प्रतिभागियों को संबोधित किया तथा "एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना" के महत्व एवं इस क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु उत्साहवर्धन किया और अपने अनुभवों से उचित मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के तकनीकि सत्र में, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एन पी सी), भुवनेश्वर के उप निदेशक, श रोशन कुजुर ने एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना का एमएसएमई के ऊपर प्रभाव, लीन टूल्स के इस्तेमाल एवं इसके लाभ हेतु आवेदन प्रकिया विषय पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सुजीत कुमार, सहायक निदेशक ने एमएसएमई मंत्रालय, नई दिल्ली के दवारा एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना पर भेजे गए प्रेजेंटेशन उद्यमियों को दिखाया एवं हर तरह की जानकारी साझा की। उपस्थित प्रतिभागियों का एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना के तहत शाखा एमएसएमई डीएफओ, धनबाद के कर्मियों द्वारा ऑन स्पॉट पंजीकरण भी किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत समापन, धन्यवाद ज्ञापन द्वारा करते हुए श्री सुजीत कुमार, सहायक निदेशक ने सभी प्रतिभागियों को शुभकमनाएं दी एवं सभी को "एमएसएमई कम्पिटीटीव लीन योजना" को अपनाने हेतु आह्वान किया। उन्होंने हर संभव सहायता देने हेतु प्रतिभागियों को भरोसा दिया एवं उनके सवालों का निराकरण किये। कार्यक्रम में कुल 60 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया एवं कार्यक्रम का लाभ उठाया।
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