धनबाद। बुधवार को प्राणजीवन एकेडमी में झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति द्वारा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई समिति की सक्रिय अध्यक्ष रीना मंडल ने की।उनके नेतृत्व में बच्चों को 200 बांग्ला ‘वर्ण परिचय’ (भाग–I) पुस्तकें वितरित की गईं। किताबें पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन ने भी इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया।रीना मंडल ने कहा, “बांग्ला भाषा केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत है। बच्चों को उनकी मातृभाषा से जोड़ना समिति का मुख्य लक्ष्य है।”उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में धनबाद के अधिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी इसी तरह का किताब वितरण अभियान चलाया जाएगा।समिति की सदस्य बरनाली गुप्ता ने भी कहा, “बांग्ला हमारा अभिमान है, बांग्ला हमारा परिचय है, और इसे संजोकर रखना हर बंगाली का फर्ज है।”उनके शब्दों ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को मातृभाषा के प्रति अधिक जागरूक किया।
प्राणजीवन एकेडमी का 93 वर्षों का गौरवशाली इतिहास
धनबाद प्राणजीवन एकेडमी हाई स्कूल की स्थापना 1932 में स्वर्गीय क्षितिज चंद्र चटर्जी ने की थी। यह विद्यालय मूल रूप से बंगाली मीडियम था, जिसे बाद में हिंदी मीडियम में परिवर्तित कर दिया गया।इसके बावजूद, विद्यालय में आज भी बांग्ला विषय की शिक्षा सुचारू और मजबूत रूप से जारी है।स्वर्गीय क्षितिज चंद्र चटर्जी 100 वर्ष 127 दिन तक जीवित रहे और अपने पूरे जीवन में सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। उन्होंने इस विद्यालय की स्थापना समाज के गरीब और जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के उद्देश्य से की थी।इसी विद्यालय का स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन से भी विशेष और ऐतिहासिक संबंध रहा है।प्राणजीवन एकेडमी और शिबू सोरेन का यह जुड़ाव अकादमी के इतिहास का गौरवशाली अध्याय माना जाता है।
पहल ने दी बांग्ला शिक्षा को नई ऊर्जा
रीना मंडल की इस पहल ने न केवल किताबें बांटने का कार्य किया, बल्कि बांग्ला भाषा की जड़ों, संस्कृति, विरासत और शिक्षा को नई ऊर्जा प्रदान करने का संदेश भी दिया।प्राणजीवन एकेडमी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समिति के प्रयासों ने मिलकर धनबाद में बांग्ला शिक्षा को एक बार फिर नई दिशा देने का काम किया है। उपस्थित में स्कूल के प्रधानाध्यापक मिथिलेश लाल कर्ण, बंगाली शिक्षक देव कुमार बनर्जी, मनोजीत मजूमदार, कुणाल माजी, सरबानी चटर्जी, शुक्ला घटक, गीता कुमारी।




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