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धनबाद में सजा किताबों का संसार, आज से चार दिवसीय पुस्तक मेले का होगा आगाज


धनबाद  : शहर के साहित्य प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए आज से एक खास अवसर शुरू हो रहा है। विवाह भवन (उत्सव भवन), कला भवन के सामने, लूबी सर्कुलर रोड, धनबाद में 16 से 19 अप्रैल, 2026 तक चार दिवसीय भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और परिसर में सजे आकर्षक स्टॉल पाठकों का मन मोह रहे हैं।

 *मेले का उद्घाटन आज प्रातः*

 नगर के गणमान्य अतिथियों द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं शहर के अनेक प्रमुख नागरिक शामिल होंगे। इसके साथ ही आम पाठकों के लिए भी मेले के द्वार खोल दिए जाएंगे। प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक लोग इस ज्ञान उत्सव का आनंद ले सकेंगे।

 *देश के नामचीन प्रकाशनों की शानदार भागीदारी* 

इस पुस्तक मेले में समय प्रकाशन, यश प्रकाशन, दीपा प्रकाशन, अनु प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, प्रभात प्रकाशन, राधाकृष्ण प्रकाशन, डायमंड बुक्स, दिनकर पुस्तकालय पेंगुइन प्रकाशन तथा हिन्द युग्म जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों की पुस्तकों का विशाल संग्रह एक ही स्थान पर उपलब्ध है। साहित्य, समसामयिक विषय, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें, धार्मिक ग्रंथ और बाल साहित्य की विविधता हर वर्ग के पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

 *रचनात्मकता और प्रतिभा का मंच* 

मेले के दौरान बच्चों और युवाओं के लिए कविता पाठ, कहानी लेखन, चित्रकला, नृत्य और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें भागीदारी नि:शुल्क होगी तथा विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा कवि-कवयित्री सम्मेलन, साहित्यिक गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले को और जीवंत बनाएंगे। आयोजन समिति एवं समय इंडिया के  प्रबंधन्यासी चंद्र भूषण का मानना है कि यह मेला पाठकों को किताबों के करीब लाने का एक रचनात्मक प्रयास है। मेला केवल पुस्तकों की बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को सशक्त करने और नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। धनबाद का यह पुस्तक मेला ज्ञान, विचार और संस्कृति का एक प्रेरणादायी उत्सव बनकर उभरेगा।

झारखंड में पुस्तक एवं पठन संस्कृति को मिलेगी नई उड़ान 

धनबाद। किताबें अब सिर्फ अलमारियों की शोभा नहीं रहेंगी, बल्कि स्कूलों की सक्रिय भागीदारी के साथ एक बड़े शैक्षिक अभियान का केंद्र बनेंगी। राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी करते हुए सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कहा है कि आगामी पुस्तक मेलों में स्कूलों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए और उपलब्ध बजट से पुस्तकों की खरीद भी अनिवार्य रूप से कराई जाए।  यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पठन संस्कृति तेजी से कमजोर पड़ती दिख रही है। समय इंडिया (ट्रस्ट), नई दिल्ली और पुस्तक मेला समिति, रांची के संयुक्त तत्वावधान में अप्रैल–मई 2026 के दौरान धनबाद, बोकारो चाईबासा, जमशेदपुर, गुमला, पलामू और गोड्डा सहित विभिन्न जिलों में चार दिवसीय पुस्तक मेलों का आयोजन किया जा रहा है। इन मेलों में हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं की ज्ञानवर्धक, उपयोगी और प्रेरणादायी पुस्तकों का व्यापक प्रदर्शन होगा। शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद यह आयोजन अब महज औपचारिक मेला नहीं रह गया है, बल्कि इसे शिक्षा व्यवस्था से सीधे जोड़ दिया गया है। स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की भागीदारी के साथ पुस्तक चयन और खरीद की प्रक्रिया को भी सक्रिय रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है।

     विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने, उनकी सोच को व्यापक बनाने और शिक्षा के वातावरण को समृद्ध करने की दिशा में एक ठोस कदम है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो झारखंड में पुस्तक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी और यह अभियान एक व्यापक शैक्षिक बदलाव का आधार बन सकता है।

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