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देश भक्ति के लिए धर्म का आचरण होना जरूरी:देव पुजारी





धनबाद। तन हिंदू, मन हिंदू, जीवन हिंदू और रग -रग में हिंदू...। हिंदुत्व एकता, हिंदुत्व शक्ति तथा हिंदुओं में स्वमान का अलख जगाने तीन दिवसीय प्रवास पर धनबाद पहुंचे संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्रीश देव पुजारी ने धैया के रानीबांध और बस्ताकोला में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन को आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पहले एकल श्री हरिकथा की टीम ने कई राम भजन और हनुमान चालीसा पाठ किये। तदोपरांत राजकमल और डीएवी अलकुसा के संगीत शिक्षक ने भजन और अन्य मंचों के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कलाकारों को प्रेस क्लब, धनबाद के कोषाध्यक्ष सह आवाज के विशेष संवाददाता मनोज शर्मा व ठाकुर कुल्ही के समाज सेवी बबलू सिंह  ने सम्मानित किया। मुख्य वक्ता श्री पुजारी ने कहा कि सनातन ही दुनिया का श्रेष्ठ धर्म है। उन्होंने कहा कि यह स्थापित सत्य है कि हिंदू समाज का इतिहास तब बना, जब हिंदू एकजुट हुआ। हिंदू सुरक्षित रहेगा तभी अपना राष्ट और अपनी संस्कृति व सभ्यता सुरक्षित रहेगी। उन्होंने अपने ओज पूर्ण संबोधन से सकल हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया। 


*पंच परिवर्तन में बदलाव ही हिन्दू सम्मेलन का लक्ष्य*

श्री पुजारी ने बताया कि संघ की शताब्दी वर्ष पर 1 साल में 1 लाख जगहों पर हिंदू सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है, जिसके निमित्त देश के 58,944 मंडलों और 44,955 बस्तियों में हिंदू सम्मेलन के जरिए पंच परिवर्तन में बदलाव लाना है। उन्होंने युवा पीढ़ी को आत्म पहचान की जरूरत बताते हुए हिंदुओं को डिगभ्रमित होने से बचने का आह्वान किया। 

*गीता, गाय और गंगा हमारी संस्कृति*

मुख्य वक्ता ने कहा कि, हम हिंदू हैं लेकिन हमारी धारणाएं भिन्न हैं। हमारी संस्कृति गीता, गाय और गंगा की है। मातृ-पितृ और गुरुवै नम: हमारी सनातनी परम्परा रही है, मगर दुर्भाग्य है कि पाश्चात्य प्रभा व में संस्कार का  क्षरण हो रहा है। बच्चों को संस्कार देने की जरूरत है,  देश में वृद्धाश्रम की संख्या बढ़ती जा रही है। इसमें बच्चों द्वारा माता-पिता को बोझ बताकर वहां रहने के लिए विवश किया जा रहा है। 

*मातृभा षा का करें सम्मान*

अंग्रेजियत के प्रभाव में अपनी मातृभाषाओं में  मिलवट होने की चर्चा उन्होंने उदाहरण के साथ की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भाषा पर प्रेम रहेगा तभी देश से प्रेम कायम रहेगा। पाश्चात्य संस्कृति, वेश-भूषा, पहनावा, खान-पान और गान का विरोध किया। आजकल डीजे पर बजने वाले गाने में अश्लीलता और हृदय को घात बताने वाली बताकर भारतीय संगीत को सुर प्रधान और चित्त को शांत करने वाला बताया। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया। 

देशभक्ति के लिए धर्माचरण जरूरी*

देश भक्ति के लिए धर्म का आचरण होना जरूरी बताया। सेवा को धर्म बताते हुए चेतना का विकास स्वार्थ रहित होना ही भारतीयता का लक्ष्य बताया। कार्यक्रम में केशव हड़ोदिया, नितिन हड़ोदिया, केदारनाथ मित्तल, विभूति शरण सिंह, सत्येंद्र मिश्रा, योगेंद्र तुलस्यान व अन्य शामिल थे। बच्चों द्वारा गतका का भी प्रदर्शन किया गया।

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