"राजाओं का राजा है, वो प्रभु का प्रभु है" भक्ति गीत से, प्रार्थना करते हुए, "ख्रीस्त राजा की जय" एवं "ख्रीस्त हमारा राजा है" का नारा लगाते हुए भव्य शोभायात्रा में हजारों ईसाई धर्म लंबी शामिल हुए तथा एक लंबी यात्रा करते हुए चर्च परिसर तक वापस आए। कैथोलिक ईसाई धार्मिक धर्म विधि वर्ष काल के अंतिम रविवार को "ख्रीस्त राजा पर्व" का त्यौहार मनाया जाता है। आज 26 नवंबर रविवार प्रातः 7:30 बजे हजारों की संख्या में ईसाई धर्म लंबी चर्च में एकत्रित हुए। जहां संत अंथोनी चर्च के फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो के द्वारा पारलौकिक राजत्व की आशीष की गई तथा भव्य शोभायात्रा मार्ग में शामिल किया गया। प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए जमशेदपुर धर्म प्रांत के विशप के सचिव फादर सुशील डुंगडुंग ने अपने उपदेश में कहा- हम सब ने प्रभु यीशु को अपना राजा माना है और आज जुलूस में शामिल होकर हमने प्रभु यीशु ख्रीस्त को एक बार फिर से अपना राजा पूरी दुनिया के सामने घोषित किया है। आज पूजन वर्ष का अंतिम रविवार अर्थात 34 वां रविवार है। कैथोलिक संघ का पूजन वर्ष आगमन कल से शुरू होकर ख्रीस्त राजा जयंती तक का माना जाता है। ख्रीस्त राजा पर्व के बाद आगमन कल शुरू हो जाता है जिसमें क्रिसमस तथा चालीसा काल आते हैं। ख्रीस्त राजा पर्व की शुरुआत सन 1925 ई में संत पापा पायस 11वां (पोप) के द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने इसकी शुरुआत एक विशेष मकसद से की थी। दरअसल सन 1918 के प्रथम विश्व युद्ध के बाद समाज में लोगों की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी। विशेष कर सामाजिक तथा राजनीतिक अराजकता फैली हुई थी। लोगों का ईश्वर पर से विश्वास धीरे-धीरे कम हो चला था। इसलिए संत पापा के इस निर्णय से ख्रीस्त राजा जयंती की शुरुआत की गई जहां उन्होंने लोगों से यह आह्वान किया की उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हमारा राजा स्वयं प्रभु यीशु है और इस प्रकार कैथौलिक कलीसिया ने प्रभु यीशु को अपना राजा स्वीकार एवं घोषित किया। तब से लेकर आज तक हम सभी बहुत ही श्रद्धा पूर्वक ख्रीस्त राजा जयंती के रूप में आज के इस दिन को मनाते आ रहे हैं और बड़े ही जोश में हम चौक चौराहों पर खड़े होकर जुलूस निकालकर सभी लोगों के सामने यह ऐलान करते हैं कि हमारे दिलों का राजा, पूरी मानव जाति का राजा स्वयं प्रभु यीशु ख्रीस्त है। पर जब भी हम राजा के बारे में सुनते हैं तो हमारे मन में स्वतः ही बचपन में सुनाई राजा- रानी की कहानी आ जाती है। जिसमें हमें यह बताया जाता है की राजा सिंहासन पर बैठता है, हीरों से जड़ा मुकुट पहना है, सोने चांदी के वस्त्र धारण करता है तथा दास दासियों से घिरा रहता है। वहीं दूसरी ओर जब हम अपने राजा अर्थात यीशु ख्रीस्त को देखते हैं तो यह पाते हैं कि उन्होंने अपने सर पर कांटों का मुकुट धारण किया, अपना क्रूस स्वयं उठाया और स्वयं सर झुका कर पिता ईश्वर से हमारे लिए प्रार्थना की। वह स्वयं नम्र एवं विनीत रह कर हमारे पापों का भार अपने कंधों पर उठा लिया। यहां तक की हमारे उद्धार के लिए अपने प्राण तक त्याग दिए। जब उनसे यह पूछा गया कि ईश्वर के राज्य में सबसे बड़ा कौन होता है तो उन्होंने सहर्ष यह उत्तर दिया कि यदि आपका मन एक बच्चे की भाती कोमल है तभी आप स्वर्ग राज में बड़े कहलाए जाएंगे। हमारा राजा जो स्वयं को हमारा चरवाहा कहता है और एक भले चरवाहे की नाई वह भीड़ में से उस भटकी हुई भेड़ को खोज निकालता है और सही रास्ता दिखाता है। इसलिए प्रभु यीशु ही हमारा सच्चा चरवाहा एवं राजा है। प्रार्थना सभा के अंत में संत एंथोनी चर्च के फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिशिर प्रभात तिर्की, इतवा टूटी, अनिल कुजूर, ईवान वॉकर, जॉन कैंप, जेम्स किंडो, जीवन कुजूर, चेतन किंडो आदि की सक्रिय भूमिका रही।




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