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धनबाद सोसायटी ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी के गोल्डेन जुबली वर्ष पर दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सुरक्षित मातृत्व पर नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर चर्चा किया



धनबाद। धनबाद सोसायटी ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी के गोल्डेन जुबली वर्ष पर दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन शनिवार को बैंक मोड़ स्थित एक होटल में शुरू हुआ। इसमें देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सुरक्षित मातृत्व पर नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर चर्चा की। चिकित्सकों ने कहा कि हर साल प्रसव के दौरान और डिलीवरी के बाद जटिलताओं से बड़ी संख्या में गर्भवती और प्रसूताओं की मौत हो जाती है। इनमें बड़ा कारण प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव है। समय पर सही इलाज और प्रशिक्षित डॉक्टरों की मदद मिले तो माताओं की जान बचाई जा सकती है। दूर-दराज से रेफर होनेवाली प्रसूताओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने की चुनौती पर भी विशेष चर्चा हुई। डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव मातृ मृत्यु का प्रमुख कारण है। ऐसी स्थिति में कुछ ही मिनटों में प्रसूता की हालत तेजी से बिगड़ती है। इससे निबटने को चिकित्सकों को पीपीएच का प्रशिक्षण दिया गया ताकि मरीज की जान बचाई जा सकती है। डॉ मित्रा सक्सेना, डॉ शीला, डॉ पूनम गोयल, डॉ मंजू पुरी ने चिकित्सकों को आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी दी। दवाओं का सही उपयोग, इमरजेंसी मैनेजमेंट, रक्त की उपलब्धता और आवश्यक सर्जिकल तकनीकों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी जा रही है। आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ कोमल सिंह ने बताया कि पांच समूहों में बांटकर पांच अलग-अलग स्किल सेशन में पीपीएच मैनेजमेंट, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, बांझपन, प्रसव संबंधित जटिलताएं और कानूनी पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया कि सम्मेलन के दूसरे दिन गर्भ संस्कार, सीजेरियन सेक्शन पर विस्तृत चर्चा व ऑपरेशन कार्यक्रम के साथ संगठन के सोवेनियर का विमोचन होगा। 12.30 बजे सम्मेलन का उ‌द्घाटन और स्वर्ण जयंती सेलिब्रेशन होगा।


सम्मेलन में दिल्ली, नोएडा, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, झारखंड और बिहार की करीब 300 प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ शामिल हुईं।

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