Hot Posts

6/recent/ticker-posts

चंदन स्टूडियो द्वारा राजेंद्र सरोवर में आयोजित हुआ बंगाली सांस्कृतिक समृद्धि का अद्वितीय पर्व दोल उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ महिलाओ और बच्चों ने पलाश, गेंदा-फूल, और हर्बल गुलाल के साथ होली खेला

 




धनबाद : चंदन स्टूडियो द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होली के अवसर पर राजेंद्र सरोवर पार्क में छठे साल "दोल उत्सव" का आयोजन किया गया। " महिलाएं, बच्चे पीली  साड़ीयो मे फूलो से सजकर रविंद्र संगीत  पर नृत्य करते हुए अतिथियों के साथ राजेंद्र सरोवर पार्क की परिक्रमा की, तत्पश्चात विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान महिलाएं और बच्चे  पलाश, गेंदा-फूल, और हर्बल गुलाल के साथ होली खेलते नजर आए। कार्यक्रम में विभिन्न नृत्य विद्यालयों की छात्राएं ने बसंत पर आधारित रविंद्र नृत्य प्रस्तुत किया।दोल उत्सव में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 500 महिलाएं, पुरुष और बच्चे भाग लिया । कार्यक्रम में भाग लेने वाले सदस्यों के बीच भी लकी ड्रा का आयोजन हुआ, जिसमें ड्रॉ में विजयी होने वाले प्रतिभागियों, नित्य विद्यालय के शिक्षकों, और चंदन स्टूडियो के सदस्यों को अतिथियों ने सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में धनबाद के प्रतिष्ठित नृत्य विद्यालय , सांस्कृतिक शिक्षण केंद्र-सरायढेला ,  सोमपा मुखर्जी डांस एकेडमी हीरापुर,गुरु सूर नृत्य संगम धनबाद  ,सास्वती सेन डांस अकैडमी- झरिया, बौठान ग्रुप ,नृत्य मलिका डांस एकेडमी, अनुराधा डांस अकैडमी मोनाइटर मॉनिईटांड़ के बच्चों ने भाग लिया ।कार्यक्रम का मंच संचालन सुवर्णा बनर्जी द्वारा किया गया , अंत में कुशन  सेनगुप्ता के रविंद्र संगीत " रांगिए दिये जाओ" संगीत में सामूहिक रूप से सभी  टीमों ने सभी अतिथियों को लेकर नृत्य किया। कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर सिंफर के पूर्व निदेशक एवं लिंडसे क्लब के अध्यक्ष अमलेंदु सिंहा एवं उनकी पत्नी क्रेडो वर्ल्ड स्कूल की प्राचार्य शर्मिला सिंहा ,धनबाद के  मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल एवं उनकी पत्नी विणा अग्रवाल उपस्थित थी। साथ ही बीबीएमकेयू के बांग्ला विभागाध्यक्ष शर्मिला बनर्जी ,आर्ट एंड कल्चर के हेड ताप्ती चक्रवर्ती, बंगाली कल्याण समिति के सचिव कंचन दे, बंगाली वेलफेयर सोसाइटी के सचिव गोपाल भट्टाचार्य, वार्ड नंबर 25 के पार्षद  प्रिया रंजन, कवि तपन राय, दुर्गा मंदिर रिलिजियस चैरिटेबल ट्रस्ट से बरनाली सेनगुप्ता, झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति से रीना मंडल, हेमंत मंडल, व अन्य उपस्थित थी।


"दोल उत्सव" बंगाली संस्कृति की पहचान है- रीना मंडल

"दोल उत्सव" होली के पहले मनाया जाता है। "दोल" शब्द का मतलब "झूला" होता है। दोल उत्सव के दिन सुबह-सुबह सभी महिलाएं, रविंद्रनाथ संगीत "ओरे गृहबासी खोलद्वार खोल"गाना गुनगुनाते हुए नाचते झूलते हुए पीले परिधान में सभी एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और बसंत का स्वागत करते हैं। सिर पर लाल पलाश के फूल हल्दी रंग की साड़ियों में सभी बहुत ही सुंदर और मोहक लगती है। रविंद्रनाथ टैगोर के पुत्रवधू प्रतिमा देवी ने लिखा है "दोल उत्सव का मतलब है शांति निकेतन, बिना शांति निकेतन आए दोल उत्सव का आनंद ही नहीं मिल सकता।" दोल उत्सव शीत को विदा करते हुए नवीन बसंत कल का भी प्रतीक है। बंगाल में होली के पर्व को "दोल उत्सव" कहते हैं।दोल उत्सव" कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर का स्थापित शांतिनिकेतन में होली पर आयोजित उत्सव है , जहां रविंद्र संगीत और नृत्य के माध्यम से "दोल उत्सव" मनाया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंगाली समुदाय के सांस्कृतिक दोल उत्सव  की संस्कृति को बनाए रखना और इसे व्यापकता से प्रसारित करना है।


ये रहे मौजूद

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर आरती साव,  संपा सरकार , संजय सेनगुप्ता , नूपुर ,दीपा, संतोष सील, गौरव मोदक, पोम्पा पाल,संतोष दास, काकुली सेनगुप्ता, शिल्पी घोष ,इशिका खत्री,अभिजीत राय, दिलीप, अनन्या,सानिया, सृंजिनी  चंदन स्टूडियो के प्रोडक्शन टीम में राजकुमार सिंह, सुभोजित  घोषाल,  छोटू साव , विनोद ,देवव्रत,व रमेश गांधी का महत्वपूर्ण भूमिका रहा।




Post a Comment

0 Comments