धनबाद। आज सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व गुरु नानक पुरा गुरुद्वारा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पटियाला से आए कीर्तन जत्था जसकिरण सिंह ने मधुर कीर्तन से संगत को निहाल किया, वहीं पंजाब से आए हरजीत सिंह हरमन ने गुरु के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु हरगोबिंद सिंह का जन्म 1595 बडाली गांव में गुरु अर्जन देव के घर पर हुआ था। 11 वर्ष की आयु में ही अपने पिता से गुरु गद्दी की उपाधि प्राप्त की। गुरु ने मीरी व पीरी नाम से दो तलवारें धारण की। पीरी नाम की तलवार आध्यात्मिक रक्षा के लिए और पीरी नाम की तलवार सैन्य शक्ति के लिए धारण की। इससे सिखों की शक्ति में जबरदस्त उछाल आया। इसके बाद उन्होंने सिख धर्म के लिए बहुत सी लड़ाइयां लड़ी।
गुरु हरगोबिंद ने अकाल तख्त का निर्माण भी किया। गुरु हरगोबिंद के संदेश हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने मानवता के कल्याण, धर्मनिरपेक्षता, आपसी भाईचारे के लिए काम किया। उनका संदेश हमें सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरणा देते रहेंगे। इस अवसर दोपहर और शाम के दीवान के बाद गुरु का अटूट लंगर वितरित हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरु नानक पुरा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र सिंह राजपाल, सचिव हरजीत सिंह, सतपाल सिंह, बलबीर सिंह राजपाल, गुरमीत सिंह, हरमिंदर सिंह, हरभजन सिंह अमरजीत सिंह दुआ, प्रितपाल सिंह,मनिंदर सिंह, रवि प्रीत सिंह आदि का सराहनीय योगदान रहा।




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