धनबाद। बॉलीवुड की प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर पलक मुच्छाल के गीतों पर धनबाद झूमेगा। 29 सितंबर को गोल्फ ग्राउंड में साहित्य विकास परिषद के साहित्य गौरव दिवस 2024 कार्यक्रम में भाग लेने पलक धनबाद आ रही हैं। इस अवसर पर 100 साहित्यकारों को हिंदी से भी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उनके के साथ सिंगर पलाश मुच्छाल भी पहुंच रहे हैं। धनबादवासी भी पलक मुच्छाल को सुनने के लिए बेताब है।
पलक मुच्छाल का एक परिचय
पलक ने अपने हिंदी फ़िल्मी करियर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म दमादम से की। उसके बाद उन्होंने "ना जाने कबसे", "एक था टाइगर", "फ्रॉम सिडनी विथ लव","आशिकी 2" और बंगाली फिल्म रॉकी के लिए गाने गाये। परन्तु पलक को हिंदी सिनेमा में कामयाबी फिल्म "एक था टाइगर" और "आशिकी 2" से मिली।
सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती है पलक
पलक बचपन से समाजिक क्रियाकलाप में सक्रिय हैं। जब वह महज पांच साल की थीं, तभी से वह इससे जुड़ी हुई हैं। वह बचपन से ही गरीबों की मदद करती चली आ रही हैं। साल 1999 में जब कारगिल की लड़ाई छिड़ी थी, तब उन्होंने शहीदों के परिवारों के लिए दुकानों और गली के नुक्कड़ों पर गाना गाकर चंदा इकट्ठा किया। पलक अपनी गायकी का सार्वजानिक प्रदर्शन कर चंदा इकट्ठा कर गरीब बच्चों की सहायता करती थीं।
उसके बाद वह अपने भाई पलाश के साथ विदेशों में स्टेज शो करने लगीं, उन स्टेज शो से वह जो भी पैसा कमाती हैं, उसे गरीब बच्चों को दान करती हैं। उन्होने अपनी प्रदर्शनी का नाम "दिल से दिल तक" रखा है। पलक अपनी प्रदर्शनी मे औसतन 40 गाने गाती हैं जिनमे हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गाने, भजन तथा गज़लें शामिल होती हैं।
सन 2001 मे पलक ने गुजरात के भुकंप पीडितों की सहायता के लिए 10 लाख रुपये का चंदा इकट्ठा किया। पलक की बच्चों के प्रति सहानुभूति सिर्फ भारत तक सीमित नही है। जुलाई 2003 में पलक ने पाकिस्तान की एक बच्ची, जो ह्रदय रोग से पीडि़त थी और भारत मे इलाज के लिए आई थी, उसके लिए वित्तीय सहायता की पेशकश की। दिसम्बर 2006 तक पलक ने अपने संगठन पलक मुच्छल हार्ट फाऊंडेशन के लिए कुल 1.2 करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा की थी जिससे 234 बच्चों का ऑपरेशन किया गया। पैसों के कमी कि वजह से किसी बच्चे का ऑपरेशन न रुके यह सुनिश्चित करने के लिए इंदौर की भंडारी हॉस्पिटल ने पलक मुच्छल हार्ट फाउंडेशन को दस लाख रुपये तक के ओवरड्राफ्ट की अनुमति दी है।
जून 2009 तक पलक ने कुल 1.71 करोड़ रुपये कि राशि इकट्ठा की थी जिससे 338 बच्चों की जान बचायी जा सकी। इस सामाजिक संगठन के पैसों से पलक या उनके परिवारवालों को कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं होता। लाभार्थी बच्चों से पलक प्रतीक के रुप मे एक गुडि़या स्वीकार करती हैं।
हिंदी साहित्य को बढ़ावा दे रही है सस्था
साहित्य विकास परिषद इससे पहले अपने मंच पर बॉलीवुड के विख्यात सिंगर कैलाश खेर और कवि कुमार विश्वास को बुला चुकी है। संस्था के राकेश शर्मा, जयप्रकाश अग्रवाल और संजय आनंद के नेतृत्व में हिंदी साहित्य विकास परिषद हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने में जुटी है।


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