बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है और कानून की नजर में दंडनीय अपराध- शंकर रवानी
धनबाद :भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के गांवों व कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा के समापन के अवसर पर झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त धनबाद और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब हैं। झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। जिले में बाल विवाह मुक्ति रथ को सांसद के आवसीय कार्यालय से 02 फरवरी को बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इन 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले में 600 किलोमीटर यात्रा की। यह रथ 60 गांवों तक पहुंचा और 50000 लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चार दिसंबर, 2025 को देशव्यापी ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जगरूकता कार्यक्रम चलाया गया। झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट के निदेशक शंकर रवानी ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा, “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।”
तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें।




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