धनबाद। कोयला नगरी धनबाद के कोयलानगर स्थित जुबली भवन के सभागार में सामाजिक न्याय के महानायक, मंडल आयोग के जनक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल जी की 108वीं जयंती समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय तरीके से मनाई गई। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन बैकवर्ड क्लास (ओबीसी) कोल इम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, धनबाद द्वारा किया गया था। जैसा कि सर्वविदित है कि मंडल जी का जन्म आज ही के दिन 25 अगस्त 1918 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके जन्मदिवस को ओबीसी समाज सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाता है। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा बी.पी. मंडल जी की तस्वीर पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर सभागार खचाखच भरा हुआ था और कोयला उद्योग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में IIT-ISM धनबाद के प्रतिष्ठित और विद्वान प्रोफेसर प्रो. के. पी. अजीत ने मंच को संबोधित किया। उन्होंने बी.पी. मंडल जी के संपूर्ण जीवन, उनके संघर्ष और उनके द्वारा पिछड़े वर्ग के लिए किए गए अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340, 341 और 342 में जो OBC आरक्षण का प्रावधान किया गया है, उसकी नींव बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने रखी थी। बाबा साहेब ने ही सबसे पहले यह महसूस किया था कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था होनी चाहिए। प्रो. अजीत ने आगे कहा कि मंडल जी की अध्यक्षता में वर्ष 1979 में जो द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया गया, जिसे हम मंडल आयोग के नाम से जानते हैं, उसने देश के 52 प्रतिशत पिछड़े वर्ग की पहचान की और 1970 के बाद की सामाजिक स्थिति का आकलन कर 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की। यह रिपोर्ट केवल एक दस्तावेज नहीं थी, बल्कि देश के करोड़ों वंचितों की उम्मीद थी। मंडल जी ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया था कि आरक्षण कोई खैरात नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का अधिकार है।
अपने ओजस्वी भाषण में प्रो. अजीत ने 1990 के उस ऐतिहासिक क्षण को भी याद किया जब तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय वी.पी. सिंह जी ने तमाम विपरीत परिस्थितियों, राजनीतिक विरोध और सामाजिक दबावों के बावजूद मंडल आयोग की सिफारिशों को संसद के दोनों सदनों में पारित कराकर देश के पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का हक दिलाया। यह निर्णय भारत के सामाजिक इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ था। आज यदि केंद्रीय सेवाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और शिक्षण संस्थानों में ओबीसी समाज के लोग अधिकारी बनकर बैठे हैं, तो इसका श्रेय मंडल जी और वी.पी. सिंह जी को जाता है। कार्यक्रम में उद्घाटन वक्ता के रूप में बिदेश्वरी प्रसाद जी ने मंडल जी की जीवनी और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर सारगर्भित प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एक जमींदार परिवार में जन्म लेने के बावजूद मंडल जी ने हमेशा गरीबों, शोषितों और वंचितों की लड़ाई लड़ी।
इस अवसर पर बीआईटी सिंदरी से सेवानिवृत्त प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. आर. के. ठाकुर जी का भी प्रेरणादायक संबोधन प्राप्त हुआ। साथ ही जेबीसीसीआई सदस्य के. पी. गुप्ता जी ने भी अपने विचार रखे और एसोसिएशन के कार्यों की सराहना करते हुए अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन बीसीसीएल के कोयला अधिकारी और बैकवर्ड क्लास (ओबीसी) कोल इम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के बीसीसीएल प्रभारी देव कुमार वर्मा जी ने किया। देव कुमार वर्मा जी ही इस पूरे आयोजन के मुख्य संयोजक रहे, जिनके अथक प्रयास से यह कार्यक्रम सफल हो सका। कार्यक्रम के अंत में एसोसिएशन के महामंत्री सुभाष माली जी ने सभी आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस गरिमामय अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामदुलार सिंह, महामंत्री भोलानाथ यादव, मदन राम, देव कुमार वर्मा, रामदुलार सिंह, दयाराम सिंह यादव, बीरेन गोपे, दिलीप कुमार, रामप्रवेश यादव, गणेश ठाकुर, अशोक वर्मा, मनोज कुमार मल्लाह, महावीर चौहान, राम नाथ गोपे, बीर बहादुर यादव, गणेश कुमार, डॉ. रणविजय सिंह, डॉ. हरीश कुमार, राजकुमार यादव, विजय कुमार, हेमंत कुमार, मनोज कुमार साव और रवींद्र कुमार सहित प्रो. के. पी. अजीत, प्रो. आर. के. ठाकुर, बिदेश्वरी प्रसाद, के. पी. गुप्ता समेत सैकड़ों कोयला कर्मी, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मंडल जी के बताए सामाजिक न्याय के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।




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