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ॐ दिनकर सेवा ट्रस्ट' के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की 118 वीं जयंती आईआईटी-आईएसएम 'पेनमैन सभागार' में आयोजित की गई

स्वाधीनता आंदोलन की प्रमुख घटनाओं को राष्ट्रकवि के ओजपूर्ण काव्य ने गहराई तक प्रभावित किया:डॉ.राकेश सिन्हा 




Dhanbad। 'ॐ दिनकर सेवा ट्रस्ट' के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की 118 वीं जयंती आईआईटी-आईएसएम,धनबाद परिसर स्थित 'पेनमैन  सभागार' में आयोजित की गई। भारी वारिस के प्रतिकूल मौसम में भी समाज के सभी वर्गों के गण्यमान लोगों,मूर्द्धन्य बुद्धिजीवियों एवं सामान्यजनों की समारोह में अच्छी-खासी भागीदारी रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो.सुरेंद्र कुंवर,अध्यक्ष 'ॐ दिनकर सेवा ट्रस्ट' ने की और मुख्य अतिथि के रूप में  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-विचारक व पूर्व सांसद-राज्यसभा प्रो.(डॉ.)राकेश सिन्हा ने समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के नाते बीबीएम कोयलांचल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.रामकुमार सिंह व कुल सचिव डॉ.आरएन त्रिपाठी,बीआईटी सिन्दरी के निदेशक डॉ.पंकज राय,आईआईटी-आएसएम,धनबाद के प्रो.धीरज कुमार एवं दिनकर साहित्य के अध्येता विनय कुमार सिंह(बेरमो) उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती डॉ.श्वेता कुमारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो.सत्येंद्र कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष,भाजपा-धनबाद ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रकवि दिनकर के चित्र के समक्ष दीप-प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन से हुआ। तत्पश्चात् मंचासीन अतिथियों को पुष्प- गुच्छ,अंगवस्त्र एवं 'दिनकर स्मृति-चिह्न' देकर सम्मानित किया गया।

   सभाध्यक्ष प्रो.सुरेंद्र कुमार ने स्वागत भाषण से विषय- प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ.राकेश सिन्हा ने  दिनकर को जनकवि बतलाते हुए एवं उनके विराट् व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए स्वाधीनता संघर्ष में उनके राष्ट्रीय नवजागरण के स्वरों को समेटे प्रखर देशभक्तिपूर्ण काव्य एवं स्वातंत्र्योत्तर भारत के लोकतांत्रिक एवं शोषणमुक्त-समतामूलक समाज के निर्माण में दिनकर के विद्रोही व क्रांतिकारी कविताओं की भूमिका पर तर्कपूर्ण प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि  सन् 1942 की क्रांति सहित स्वाधीनता आंदोलन की प्रायः सभी प्रमुख घटनाओं को राष्ट्रकवि के ओजपूर्ण काव्य ने गहराई तक प्रभावित किया। राजनीति व गाँधी नेहरू आदि से उच्च राजनीतिक संबंधों को उन्होंने सत्य को कहने और लिखने के मार्ग में कभी बाधक बनने नहीं दिया। उन्होंने दिनकर के प्रखर समाजवादी विचारकों रामवृक्ष बेनीपुरी,बाबू गंगाशरण सिंह एवं जयप्रकाश नारायण से संबंधों की भावपूर्ण चर्चा करते हुए स्वाधीन भारत की दिशा एवं दशा तय करने में इन सबके कर्ममय चिंतन की गंभीर मीमांसा की। डॉ.सिन्हा ने पुस्तकों के अध्ययन-अनुशीलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए पुस्तकालयों के प्रति पाठकों की उदासीनता पर चिंता प्रकट की और 'पुस्तक पठन-पाठन संस्कृति' की ओर पुनः लौटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धनबाद के मात्र कोयला नगरी होने की मेरी पूर्व धारणा के विपरीत आज यहाँ के लोगों के साहित्य प्रेम एवं अनुराग ने मुझे बहुत प्रभावित किया है।

   विशिष्ट अतिथि के रूप में कोयलांचल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.रामकुमार सिंह ने दिनकरजी के साहित्यिक योगदान की चर्चा करते हुए विश्वविद्यालय के अंतर्गत 'राष्ट्रकवि दिनकर शोध-पीठ' स्थापित करने की दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया।

   दिनकर काव्य एवं साहित्य के अध्येता बेरमो(बोकारो) निवासी विनय कुमार सिंह ने अपने सारगर्भित भाषण में राष्ट्रकवि की कविताओं को उद्धृत करते हुए कहा कि ओज,उत्साह,शोषण उत्पीड़न के विरुद्ध विद्रोह एवं दुर्दम्य राष्ट्रप्रेम व देशभक्ति ही दिनकर काव्य का मुख्य स्वर है। कविवर हरिवंशराय बच्चन को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि दिनकर को उर्वशी काव्य के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला;किंतु उन्हें पद्य,गद्य,भाषा और हिंदी सेवा के लिए अलग अलग चार ज्ञानपीठ मिलना चाहिए था। समारोह में दिनकर की अनमोल कृतियों संस्कृति के चार अध्याय,उर्वशी,कुरुक्षेत्र,रश्मिरथी,परशुराम की प्रतीक्षा एवं दिनकर की डायरी के महत्वपूर्ण अंशों की प्रासंगिक चर्चा हुई।सभा को प्रो.डीके चौबे,प्रो.इंद्रजीत कुमार एवं डॉ.संजय सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ॐ दिनकर ट्रस्ट के सचिव श्री संतोष कुमार,  उपाध्यक्ष नरेश राय,संस्थापक सदस्य-द्वय रामप्रवेश शर्मा एवं विनोद कुमार,ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्षद्वय - जितेंद्र सिंह व नर्मदेश्वर सिंह, कांग्रेस नेता वैभव सिन्हा,अरविंद शर्मा, डॉक्टर आत्मा प्रकाश,  संयुक्त सचिव रणधीर मिश्र,रामदुलार राय, कोषाध्यक्ष कुमार जसवंत आनंद, संजय शर्मा, बबलू शर्मा, संतोष कुमार सिंह,श्रीमती रंजना शर्मा,प्रो.शोभा सिंह,,रामकुमार सिंह चौधरी, पूर्व प्रमुख भानु सिंह चौधरी,पूर्व मुखिया दीपक सिंह चौधरी आदि ने विशेष योगदान दिया।  

   कार्यक्रम में डॉ.रमेश शर्मा, अरुण कुमार सिंह, कृष्ण कन्हैया जी, बीसीसीएल ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अरुण कुमार सिंह,इंजिनियर-द्वय ज्ञानेश्वर कुमार व सत्येंद्र कुमार,संजय कुमार भूपेंद्र कुमार, अरविंद सिंह,संजीव कुमार, पवन कुमार आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

   राष्ट्रगान जन-गण-मन गायन से समारोह का समापन हुआ।

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