Dhanbad। क्रिसमस से ठीक चार रविवार पूर्व चर्च के फादर द्वारा यह घोषणा की जाती है की आज से आगमन काल का आरंभ होता है। आगमन काल में चर्च के फादर बैंगनी रंग का वस्त्र धारण करते हैं तथा वेदी पर बैंगनी रंग का कपड़ा लगाया जाता है। आज संत एंथोनी चर्च, धनबाद में आगमन काल की प्रथम प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया प्रार्थना सभा में फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने अपने उपदेश में कहा-
आज हम प्रभु यीशु की अगवाई में कलीसिया के नए साल की शुरुआत करते हैं। जहां हम आनंदित होकर एक साथ मिलकर आध्यात्मिक तैयारी के द्वारा अपने आप को आगमन काल के लिए तैयार करते हैं। आगमन काल तीन प्रकार के होते हैं। पहला आगमन प्रभु यीशु का जन्म था जो की आज से लगभग 2023 वर्ष पूर्व उनके जन्म के साथ शुरू हुआ था। प्रभु यीशु अपने पिता की इच्छा को पूरी करते हुए मानव रूप में धरती पर आए, हमारे बीच उन्होंने वक्त बिताया, अपने पिता की इच्छाओं को हमें बतलाया, हमारे पापों के लिए क्रूस पर अपना खून बहाया और अंततः क्रूस की मृत्यु सही ताकि हम बचाए जा सकेंं। लेकिन आज भी हम मानव जाति की वही स्थिति बनी हुई है जहां हम बार-बार पाप में गिर जाते हैं और इसलिए प्रभु यीशु का दूसरा आगमन निरंतर हमारे बीच होता रहता है। अर्थात प्रतिदिन हमारे साथ जो भी घटनाएं घटती हैं हम जिन लोगों से मिलते जुलते हैं यदि एक पूरे दिन का सार निकाला जाए और यह सोचें की आज दिन भर में हमने कितनों के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान किया, किन-किन लोगों ने हमें हमारी गलतियों को गिनाया, कितनी बार लोगों ने हमारे प्रति प्यार अथवा नफरत जताई और किस प्रकार से हमने उनका सामना किया अर्थात गलत व्यवहार किया प्यार से मिले आदि। हमारे इस घटनाक्रम को याद करने के द्वारा हम इस बात को महसूस कर सकते हैं कि जब-जब हमने आज पूरे दिन में कोई भी गलती करी उसके लिए कोई ना कोई हमें समझाने आया अर्थात हमें सही रास्ता दिखाया। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रभु यीशु आज हमारे जीवन में आए। जरूरत है तो सिर्फ उन्हें पहचानने की और उनकी उपस्थिति को अपने जीवन में महसूस करने की। तीसरा आगमन हमारी मृत्यु के समय होता है। इसलिए हमें कहा जाता है की 'जागते रहो' अर्थात हमेशा उसे तीसरे आगमन के लिए तैयार रहो ताकि जब कभी भी प्रभु हमें बुलाए तब हम जाने के लिए तैयार रहें। अब सवाल यह उठता है कि हम निरंतर जागते कैसे रहें? दरअसल जब हम निरंतर प्रभु की सेवकाई में लगे रहते हैं, ईमानदारी पूर्वक प्रभु में अपने जीवन बिताते हैं, प्रेम, दया, भरोसा और सहनशीलता जैसे गुणों को अपनाते हैं और अपना समय प्रार्थना में बिताते हैं तो यही हमारे लिए जागते रहने का उदाहरण है। इस प्रकार हम अपने आप को आगमन काल के लिए तैयार कर सकते हैं।



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