धनबाद। झारखंड बांग्ला भाषी उन्नयन समिति के प्रदेश कार्यकारी सभापति रीना मंडल जिला शिक्षा अधीक्षक से मिलकर धनबाद जिला के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा सर्वेक्षण में क्षेत्रीय भाषा के रूप में 26 जातियों के बच्चों का मातृभाषा बांग्ला के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करने एवं गलत आंकड़ा दर्ज करने के संबंध में को जानकारी दी गई। जिला शिक्षा अधीक्षक ने आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार को सही आंकड़ा भेजा जाएगा। रीना मंडल ने महोदय से बात करते हुए कहा कि क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा का सर्वेक्षण हेतु राज्य के सभी 24 जिले के प्राथमिक कक्षा वाले विद्यालयों से क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा का प्रयोग करने वाले विद्यालयों की संख्या उपलब्ध करने हेतु निर्देश प्राप्त है। धनबाद जिला के 26 जातियों (सुंडी, बावरी, कायस्थ, ब्राह्मण ,गंधवनिक,तेली,मेरा, मालाकार, स्वर्णकार, कर्मकार, कुंभकार, नापित, सूत्रधार, बैरागी, घटवाल) आदि की मातृभाषा बांग्ला है। महाशय धनबाद जिला 1 नवंबर 1956 से पूर्व मानभूम जिला के अंतर्गत था तथा यहां के गांव में रहने वाले एक बहुत बड़ी आबादी बंगला भाषियों का है। यहां के लोक संस्कृति यथा टुसू गान,भादुगान, मनसा मंगल, बाउल संगीत, पदावली कीर्तन आदि प्राचीन रचनाएं सभी बांग्ला भाषा में ही है। यहां की सभी पर्व त्यौहार बंगला पंजिका अनुसार होता है। यहां के सभ्यता संस्कृति फलने फूलने का मूल आधार बंगला भाषा।सर डब्ल्यू डब्ल्यू हंटर द्वारा लिखित पुस्तक "स्टैटिसटिकल अकाउंट आफ बंगाल"प्रकाश सिर्फ 1877 में लिखा हुआ है मानभूम की बहुसंख्यक आबादी बांग्ला भाषी है तथा यह पूरे छोटा नागपुर के सबसे सभ्य लोग हैं। महाशय अगर बांग्ला भाषा का पठन पाठन स्कूलों में नहीं होगा तो यहां के संस्कृति भी विलुप्त हो जाएगी तथा संस्कृति के साथ इन जातियों के अस्तित्व पर भी संकट आ जाएगा। मां से धनबाद जिला के बलियापुर प्रखंड धनबाद प्रखंड तो चाचा प्रकाश गोविंदपुर प्रखंड लगभग सभी प्रखंडों से गांव वालों की ओर से ऐसी सूचनाएं आ रही है कि विद्यालय का क्षेत्र भाषा के रूप में जबरन 26 जातियों की मातृभाषा बंगला के स्थान पर कुरमाली , खोरठा आदि अन्य भाषाएं विद्यालय प्रधानाध्यापक द्वारा दिया गया है। इस प्रकार के कृत्य से मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने के सरकार के महत्वाकांक्षी योजना पर प्रतिकूल असर पड़ेगा एवं बच्चों के सीखने पर प्रतिकूल असर पड़ेगा जिससे बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप के प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने का प्रावधान किया गया है तथा यह सर्वेविदित है की मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा देने से विद्यालयों की सीखने की प्रक्रिया सहज हो जाती है। संविधान के अनुच्छेद 350A तहत मातृभाषा में शिक्षा का प्रधान भी है। अतः महाशय आपसे आग्रह करती हूं कि इसकी जांच करके सही आंकड़ा प्राप्त की जाए एवं प्रमुख आंकड़ा देने वाले शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मौके पर आशीष मंडल, अभिषेक मंडल, आशीष कुमार मंडल, रघुनाथ राय, शिबू चक्रवर्ती मौजूद रहे ।




.jpeg)
.jpeg)
0 Comments