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बांग्ला भाषी कोई गैर नहीं है, आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देंगे: रीना मंडल


धनबाद।  धैया गांव में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति की बैठक समीर मंडल जी के अध्यक्षता में हुई। विषय झारखंड में बांग्ला भाषा का अवहेलना। पर समिति के संस्थापक वेंगु ठाकुर ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान बांग्ला भाषा को हुआ है। विद्यालय में पठन-पाठन राज्य अलग होने के बाद बिल्कुल बंद हो गया। जबकि झारखंड के प्रत्येक जिलों में बांग्ला भाषा बोली जाती है और बांग्ला बाहुल क्षेत्र है। झारखंड में 1932 खातियान धारी झारखंड के मूल निवासी भूमिपुत्र बांग्ला भाषी है। जबकि कुछ अभी नए-नए चुटपुटे नेता  का कहना है कि बांग्ला भाषा नाय चलतो बांग्ला भाषा बाहरी भाषा है। जबकि झारखंड की प्राचीन और मूल भाषा बांग्ला है। चुनाव के समय नेता को बांग्ला भाषा खूब याद आते हैं उसके बाद भूल जाते हैं। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष  रीना मंडल जी ने कहा अगर झारखंड के सभी बांग्ला भाषी एक हो गए तो हम सत्ता पलट भी सकते हैं और सत्ता में बैठा भी सकते हैं। बांग्ला भाषी कोई गैर नहीं है झारखंड के हैं झारखंड की माटी के हैं। सरकार को यह समझना पड़ेगा कि झारखंड के 26 जातियों की मातृभाषा बांग्ला है उनके साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। अन्यथा हम बांग्ला भाषी खूब जोर आंदोलन करेंगे और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका जवाब देंगे। कार्यक्रम में मौजूद रहे बहादुर मंडल, सुपारी लाल गोरगा, झगड़ु परघा, निमाई गोरगा, लालजीत गोरगा ,ललन देवी ,भूलन देवी, सरिता देवी, सरस्वती देवी, मीना देवी ,शोभा देवी, संतोषी गोरगा, संजोती देवी, अष्टमी देवी आदि।



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