गोविंदपुर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर गोविंदपुर के जियलगढ़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। शाम में शुरू हुई कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कथा व्यास श्री हित ललित बल्लभ नागार्च की मधुर वाणी सुन भक्त भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण भगवान के जयकारों से भक्तिमय बना रहा। कथा के दौरान व्यास जी ने श्रीमद्भागवत की रचना का वर्णन करते हुए बताया कि जब महर्षि वेदव्यास जी को आत्मिक शांति नहीं मिली, तब देवऋषि नारद ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करने की प्रेरणा दी, जिसके बाद श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना हुई।
इसके साथ ही देवऋषि नारद के पूर्व जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि कैसे सत्संग और भगवान की भक्ति से एक साधारण बालक देवऋषि नारद के रूप में पूजनीय बन गए। कथा में कुंती स्तुति का मार्मिक प्रसंग सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। व्यास जी ने कहा कि माता कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से जीवन में दुख बने रहने का वरदान मांगा था, ताकि हर परिस्थिति में प्रभु का स्मरण बना रहे। भीष्म पितामह की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति और शरशैया पर दी गई उनकी स्तुति का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। वहीं राजा परीक्षित के जन्म और शुकदेव मुनि के आगमन का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि भगवान की कृपा से ही मनुष्य को सत्संग और मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है। वहीं आयोजक श्री हित नयन कुमार मिश्रा ने बताया कि कथा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। दूर-दूर से लोग शाम होते ही कथा स्थल पहुंच रहे हैं। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, आरती और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है।



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