धनबाद। बांग्ला भाषा पढ़ाई की समस्या को लेकर झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति एवं बंगाली वेलफेयर सोसाइटी का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व विधायक अरूप चटर्जी चटर्जी के नेतृत्व में धनबाद उपायुक्त महोदया से मिले और उपायुक्त महोदया को बांग्ला पढ़ाई का समस्या को लेकर अवगत कराया, जिस पर उन्होंने सुधार करने की आश्वासन दिया। पूर्व विधायक अरुप चटर्जी ने कहा कि क्षेत्रीय एवं जनजाति भाषा का सर्वेक्षण हेतु राज्य के सभी 24 जिलों के प्राथमिक /प्राथमिक कक्षा वाले विद्यालय से क्षेत्रीय एवं जनजाति भाषा का प्रयोग करने वाले विद्यालय की संख्या उपलब्ध कराने हेतु निर्देश प्राप्त है एवं तदनरूप क्षेत्रीय भाषा के मास्टर की संख्या भी निर्धारित करना है। महाशया क्षेत्रीय भाषा बांग्ला के अनुशंसित मास्टर/ माचेत की संख्या निर्धारण में अत्यंत गड़बड़ी किया गया है। पूरे धनबाद जिला में लगभग 500 से अधिक विद्यालयों द्वारा बांग्ला भाषा क्षेत्रीय भाषा के रूप में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा सर्वेक्षण रिपोर्ट में भेजा गया है। परंतु बांग्ला भाषा के अनुसंक्षित मास्टर की संख्या मात्र 84 है जहां खोरठा भाषा के अनुसंक्षित मास्टर की संख्या 5145 है। महाशया यह बांग्ला भाषा को खत्म करने की एक साज़िश है। इतने सारे विद्यालयों द्वारा बांग्ला भाषा का रिपोर्ट भेजने के बावजूद बांग्ला भाषा अनुसंक्षित मास्टर/ माचेत की संख्या मात्र 84 है । ऐसा प्रतीत होता है कि खोरठा भाषा एवं बांग्ला भाषा के मास्टरों की संख्या निर्धारित में समान मापदंड का उपयोग नहीं किया गया है। महाशया धनबाद जिला के सभी प्रखंडों के गांव वालों की ओर से ऐसी सूचनाएं आ रही है कि विद्यालयों का क्षेत्रीय भाषा के रूप में जबरन 26 जातियों की मातृभाषा बंगाल के स्थान पर खोरठा भाषा दर्ज किया गया है। उदाहरण स्वरूप केलियासोल प्रखंड के मध्य विद्यालय केलियासोल में एक भी खोरठा भाषा विद्यार्थी नहीं है। परंतु वहां के क्षेत्रीय भाषा के रूप में बांग्ला भाषा के साथ-साथ खोरठा भाषा को भी दिया गया ऐसे अनेक उदाहरण मिलेंगे जहां गड़बड़ी किया गया है। महाशया बांग्ला भाषा के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ करने की इस प्रकार की कृत्य से मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने के सरकार के महत्वाकांक्षी योजना पर प्रतिकूल असर पड़ेगा एवं बच्चों के सीखने की प्रतिफल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा जिससे बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भी प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दिए जाने का प्रावधान किया गया है तथा यह सर्वेविविध है की मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा देने से विद्यार्थियों की सीखने की प्रतिक्रिया सहज हो जाती है। संविधान के अनुच्छेद 350A तहत मातृभाषा में शिक्षा का प्रावधान भी है। इसकी जांच करके सही आंकड़ा प्राप्त की जाए एवं बांग्ला के अनुशंसित मास्टर/ माचेत की संख्या निर्धारण सही से किया जाए एवं जिस स्तर से भी गड़बड़ी हुआ है उन्हें चिन्हित करते हुए कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधि मंडल में जिला अध्यक्ष सम्राट चौधरी, जिला सचिव राणा चट्टराज, कल्याण भट्टाचार्य, बादल सरकार,सुशोभन चक्रवर्ती शामिल थे।


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