धनबाद। झारखण्ड राज्य अवर वन क्षेत्रकर्मी संवर्ग नियमावली 2014 अधिसूचना में कार्यरत वनरक्षियों के नियमावली में संशोधन के विरोध में वन क्षेत्रकर्मी मिश्रित भवन कार्यालय के बाहर 16 अगस्त से धरने पर बैठे है। उनका कहना है कि हमारी नियुक्ति झारखण्ड राज्य अवर वन क्षेत्रकर्मी संवर्ग नियमावली 2014 के अधीन वर्ष 2017 में वनरक्षी के पद पर हुई है। हमने अपनी सेवा कुशलता पूर्वक इस पद पर 7 वर्ष से ज्यादा पूरी कर ली है तथा वन संरक्षण, वन विकास एवं जंगली जीवों से आम लोगों की सुरक्षा हेतू दिन-रात सरकार के साथ कदम से कदम तथा कंधा से कंधा मिलाकर सेवा दी है। सरकार द्वारा निरंतर कर्मचारी हित में फैसले लिए जा रहे हैं, जैसे कि पुरानी पेंशन व्यवस्था लागु करना, अन्य संवर्ग के कर्मचारी हित हेतू मानदेय में वृद्धि, सेवाकाल में वृद्धि आदि। इसके लिए झारखण्ड के समस्त कर्मचारी आपके आभारी हैं।07/08/2024 को मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या 198/2024 में बिंदु न0 20 (अनुल में, जो कि झारखण्ड राज्य अवर वन क्षेत्रकर्मी संवर्ग नियमावली 2014 से संबंधित संवर्ग के लिए अहितकारी परिवर्तन किया गया है। यह संशोधन हमारे भविष्य को खतरे में डालने वाला है। उन्होंने संशोधन को पुन वापस लेने की सरकार से मांग किया है।
वनरक्षी की प्रमुख मांगे :-
झारखण्ड राज्य अवर वन क्षेत्रकर्मी संवर्ग नियमावली 2014 के प्रोन्नती और पदसोपान संबंधी सेवा शर्त पुनः बहाल की जाय।
वनरक्षी को प्रधान वनरक्षी पर प्रोन्नति भूतलक्षी प्रभाव से किया जाय।
प्रोन्नती से शत प्रतिशत वनपाल पद भरा जाय।
वनरक्षी की बहाली अतिशीघ्र किया जाय।
वनरक्षी के खिलाफ अहितकारी संशोधन वापस लो।
वनपाल की सीधी भर्ती के लिए नियमावली बनाना बंद करो।
वर्ष 2017 में नियुक्त सभी वनरक्षी को प्रशिक्षित माना जाय।
वनरक्षी-वनपाल को राशन भत्ता देना होगा। झारखण्ड गृह विभाग के तर्ज पर
वनरक्षी-वनपाल को एक माह का अतिरिक्त वेतन देना होगा।
Fixed - TA देना होगा।
वनरक्षी-वनपाल को 1 करोड़ का जीवन बीमा देना होगा।


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