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दशम पातशाह श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 359वां पावन प्रकाश पर्व श्रद्धा, शौर्य और वैभव के साथ संपन्न

 






“तही प्रकाश  हमारा भयो,पटना शहर बिखे भव लयो”

धनबाद। श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज सिख पंथ के दशम गुरु, महान योद्धा, कवि, दार्शनिक एवं खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 359वां पावन प्रकाश पर्व आज दिनांक 27 दिसंबर 2025 (शनिवार) को कतरास रोड, बैंक मोड़ स्थित बड़ा गुरुद्वारा साहिब में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं ऐतिहासिक गौरव के साथ मनाया गया।पटना साहिब वही पावन धरती है जहाँ 22 दिसंबर 1666 ईस्वी को पटना साहिब में दशम पातशाह ने अवतार लिया। बालक गोबिंद राय के रूप में जन्मे गुरु साहिब ने आगे चलकर सम्पूर्ण मानवता को धर्म, साहस, समानता और बलिदान का मार्ग दिखाया श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज केवल एक गुरु नहीं थे, वे अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर “संत-सिपाही” की अवधारणा दी—जहाँ आध्यात्म और शस्त्र दोनों का संतुलन हो।

उन्होंने जाति-पाति, ऊँच-नीच और भय की मानसिकता को तोड़ते हुए घोषणा की—“मानस की जात सबै एकै पहचानबो।”

चार साहिबज़ादों और माता गुजरी जी का बलिदान भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है, जो अन्याय के सामने झुकने के बजाय शीश कटाने की प्रेरणा देता है। गुरु साहिब स्वयं एक महान कवि थे—दसम ग्रंथ उनकी साहित्यिक चेतना का प्रमाण है।धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत सहज पाठ की समाप्ति से आज प्रातः 7:45 बजे बड़ा गुरुद्वारा साहिब के दीवान हाल में चल रहे सहज पाठ की विधिवत समाप्ति हुई। इसके उपरांत अरदास एवं शब्द-कीर्तन के माध्यम से संगत ने गुरु साहिब को नमन किया।

मुख्य दीवान में गुरुवाणी और काव्य से निहाल हुई संग

मुख्य कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक बड़ा गुरुद्वारा ग्राउंड में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर तख्त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब के हजूरी रागी जत्था भाई अरविंद सिंह निर्गुण ने गुरुवाणी कीर्तन से संगत को आध्यात्मिक आनंद प्रदान किया।

साथ ही पंथ की प्रसिद्ध कवयित्री बीबी मनजीत कौर (पहूविंड, तरनतारण), कवि भगत सिंह बीर (जगाधरी, हरियाणा) एवं भाई मलकीत सिंह (मत्तेवाल, अमृतसर) ने अपनी ओजस्वी काव्य रचनाओं के माध्यम से श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के जीवन, बलिदान और आदर्शों पर प्रकाश डाला।

संध्या दीवान में इतिहास का भावनात्मक स्मरण

संध्या काल में शाम 7:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक पुनः विशेष दीवान का आयोजन किया गया। गुरुवाणी, वीर रस से ओतप्रोत कविताएं और गुरु साहिब की वाणी का श्रवण कर संगत भाव-विभोर हो उठी

अटूट लंगर और भव्य सजावट

पूरे दिन गुरु का अटूट लंगर श्रद्धालुओं के लिए वितरित किया गया।

इस अवसर पर बड़ा गुरुद्वारा साहिब को विशेष रोशनी, पुष्प सज्जा एवं आकर्षक पंडाल से सजाया गया, जो गुरु साहिब के प्रकाश पर्व की भव्यता को दर्शाता  है महासचिव मनजीत सिंह (पाथरडीह), अध्यक्ष गुरचरण सिंह (माझा), वरिष्ठ सदस्य मनजीत सिंह, राजेंद्र सिंह चहल, हरविंदर सिंह, अमृतपाल सिंह, राजेंद्र सिंह एवं सतपाल सिंह ब्रोका सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कविगणों ने  कहा कि

श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का जीवन आज भी अन्याय, भय और भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देता है।

उनका प्रकाश पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, साहस और आत्मसम्मान के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर है।


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