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जगजीवन नगर के श्री वेंकटेश्वर मंदिर का 38 वां वार्षिक समारोह 21 और 22 मार्च को मनाया जाएगा, मंत्रोच्चारण, मृदंग की थाप और तिरुपति के लड्डुओं की मिठास लिए विशेष कारीगर तिरुपति से आ रहे हैं



धनबाद। जगजीवन नगर स्थित बालाजी मंदिर में एक बार फिर वार्षिक महोत्सव की तैयारी जोरो से हैं। इस वर्ष यह महोत्सव २१ एवं २२ मार्च २०२६ दिन शनिवार एवं रविवार को होना तय है। ज्ञात हो कि श्री वेंकटेश्वर (बालाजी) मंदिर समिति  धनबाद 1987 के अपने स्थापना काल से लगातार वार्षिक महोत्सव मनाता आ रहा है। मंदिर कमिटी के सदस्यों द्वारा इस वर्ष भी दो दिवसीय वार्षिक महोत्सव अपने पारंपरिक रीति रिवाजों से तैयारी अपने चरम पर है।   दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का २१ मार्च की सुबह ६ बजे सुप्रभात सेवा से प्रारम्भ होकर समापन २२ मार्च रात्रि ०८.३० बजे भगवान के एकांत सेवा के साथ किया जायेगा.  कोयलांचल के लिए एक बार फिर यह एक अद्भुत नज़ारा होगा जब भगवान बालाजी की पूजा, अर्चना, आरती, अभिषेक एवं विवाह की रश्में परम्पराओं एवं विधि विधान द्वारा की जाएगी।  इस अवसर पर पूजा के लिए विशेष रूप से पुरोहितों का दल तिरुपति तिरुमला से बुलाया जा रहा है और इसके साथ ही तिरुपति बालाजी मंदिर में बनने वाले लड्डुओं के लिए विशेष कारीगर तिरुपति से धनबाद आ रहें हैं इतना ही नहीं भगवान बालाजी की प्रिय वाद्ययंत्र शहनाई एवं मृदंग बजाने वालों का भी एक दल कोयलांचल में अपनी आध्यात्मिक शास्त्रीय धुन बिखेरने पधार रहें हैं।  जगजीवन नगर स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर (बालाजी मंदिर) समिति द्वारा ३८वें वार्षिक महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं। आगामी २१ एवं २२ मार्च २०२६ को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय उत्सव में दक्षिण भारतीय संस्कृति और परंपराओं की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। मंदिर समिति के सचिव श्री जी.वी.एस.एन. राव ने बताया कि उत्सव का प्रारंभ २१ मार्च को सुबह ६ बजे 'सुप्रभात सेवा' से होगा। इस वर्ष आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशेष रूप से तिरुपति तिरुमाला से पुरोहितों का दल, लड्डू बनाने वाले कारीगर और वाद्ययंत्र वादक धनबाद पहुँच रहे हैं। सह सचिव जी राकेश राव ने बताया कि  २१ मार्च शनिवार की संध्या एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमे कोयलांचल के भिन्न भिन्न उम्र के कलाकारों द्वारा संगीत एवं वादन की सांगीतिक प्रस्तुति की जाएगी। इस आयोजन की आवश्यकता पर बताते हुए समिति के अध्यक्ष श्री के. वी. रमना राव ने कहा कि हमारी सामाजिक सांस्कृतिक जिम्मेदारी है कि हम समाज में सामूहिक तौर पर सकारात्मक वातावरण के निर्माण के लिए ईश्वर का गुणगान करें। बालाजी मंदिर कमिटी के द्वारा यह वार्षिक कार्यक्रम इसी दिशा में वर्षों से किया जाता रहा एक प्रयास है।  कार्यक्रम के भव्य आयोजन हेतु अर्थ की व्यवस्था पर अपने विचार रखते हुए मंदिर कमेटी के उप कोषाध्यक्ष रतन कुमार कुमार  ने कहा कि अर्थ की व्यवस्था सदा से ही कठिन कार्य रहा है और मंदिर परिसर की घिसाई, सफाई भी आवश्यक हो जाने भी आवश्यक हो जाने के कारण महोत्सव के आयोजन में और भी बड़ी चुनौति खड़ी हो रही है पर हमें पूरा विश्वास है कि ईश्वर के इस कार्य को पूरा समाज मिलकर सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेगा। कार्यक्रम के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए समिति के उपाध्यक्ष डॉ. बी. जगदीश राव ने बताया कि बालाजी मंदिर में मनाया जाने वाला यह एक दो दिवसीय सामाजिक महोत्सव है जिसमे दक्षिण भारतीय पूजा एवं परंपरा की झलकियां दिखती हैं। जिसमे समाज के हर वर्ग के लोग बढ़ चढ़ कर शामिल होते हैं एवं प्रत्येक श्रद्धालु अपनी निश्चित भागीदारी का यथासंभव निर्वहन करते हैं। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन २२ मार्च को श्रीवरी कल्याणम का होना है जिसमे भगवान बालाजी का विवाह माँ लक्ष्मी एवं राजकुमारी पद्मावती से कराई जाती है और इस विवाहोत्सव में कोयलांचल के पांच सौ से अधिक वैवाहिक जोडिया वैवाहिक उत्सव में सहृदय शामिल होती हैं। महोत्सव में न केवल सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा सम्पूर्ण विधि विधान से संकल्प एवं पूजा करते है और अंत में दक्षिण भारतीय व्यंजनों का प्रसाद पाकर गोविंदा गोविंदा के नारे से कोयलांचल की धरती को गुंजायमान करने में अपनी भागीदारी निभाते हैं।

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