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हिन्दू समाज जब तक जागृत नहीं होगा, कोई भी सरकार कुछ नहीं कर सकती:सुनील आंबेकर




Dhanbad। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख समाज जब तक जागृत नहीं होगा, कोई भी सरकार कुछ नहीं कर सकती ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित करने के लिए आरएसएस पिछले 100 वर्षों से कार्य कर रहा है। समाज में परिवर्तन भी दिख रहा है, परंतु इसमें गति लाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को लगना होगा।*

राजनीतिक सत्ता बदलने से हिंदू समाज का परिवर्तन नहीं

इस दौरान उन्होंने लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। सुनील आंबेकर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आज समाज में बहुत सारे रावण हो चुके हैं। संघ उन्हें राम बनाने में लगा है। इसे ठीक करने में समाज को भी लगना होगा। केवल राजनीतिक सत्ता बदलने से हिंदू समाज का परिवर्तन नहीं होगा। अगर ऐसा होता तो डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार राजनीतिक दल की ही स्थापना किए रहते। 

समाज में आई है जागृति

उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्षों की यात्रा में समाज में बहुत बदलाव हुए। समाज ने संघ को स्वीकार किया है। आने वाले समय में और बदलाव दिखेगा। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग पहले जय श्रीराम बोलने से परहेज़ करते थे, वहीं लोग आज गर्व से बोलते हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले भी अयोध्या में राम मंदिर जा रहे हैं। 

आज का युवा भजन मंडली भी चला रहा

युवाओं में बदलाव से संबंधित सवाल पर कहा कि आज का जेन जी भजन मंडली भी चला रहा है, मोदी का समर्थन भी कर रहा है। धुरंधर फिल्म भी देख रहा है और थिएटर में भारत माता के जयकारे भी लगा रहा है। इसलिए बदलाव दिख रहा है। गोवध पर प्रतिबंध से संबंधित सवाल पर कहा कि हिंदू समाज जब तक जागृत नहीं होगा, कोई भी सरकार कुछ नहीं कर सकती है। हर हिंदू के जीवन में गाय माता की उपस्थिति होनी चाहिए।

अब कर्तव्य के लिए आंदोलन होना चाहिए 

आंबेकर ने संघ के पंच परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे अपने जीवन में अपनाने की जरूरत है। इनमें एक विषय नागरिक कर्तव्य है। झारखंड में अधिकार के लिए तो बहुत आंदोलन हुए, अब कर्तव्य के लिए आंदोलन खड़ा होना चाहिए। हिंदू समाज की एकता में सबसे बड़ी बाधा जाति है।आरएसएस का एकमात्र लक्ष्य सज्जन शक्ति को एकत्रित करना, ताकि समाज को सही मार्गदर्शन मिल सके।

 दुर्जन शक्ति को एकत्रित नहीं करना पड़ता वह स्वयं हो जाती है,उदाहरण के तौर पर जैसे – आतंकवाद, उग्रवाद,माओवाद, अलगावाद भाषावाद जातिवाद,ऐसे लोगों पास जब शक्ति आती है तो ये लोग देश तोड़ने में लगातें हैं जबकि संघ हमेशा ऐसे लोगों एवं संस्था के विरोध में खड़ा रहा है।संघ का एक मात्र उद्देश्य है कि समाज में सज्जन शक्तियों को एकत्रित कर उनके बीच एकता कर समाज को सही मार्गदर्शन मिल सके इसके लिए हमेशा प्रयास करता है।

* पांच परिवर्तन .सामाजिक समरूपता। पर्यावरण =जीवित रहना है तो बदलना होगा भारतीय के तरीके से

*कुटुम्ब प्रबोधन परिवार जीवन मूल्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं मोबाइल को दरकिनार करके कम से कम सप्ताह में एक दिन अपने परिवार बच्चों के साथ घर पर बताएं। }हमारे भारत की इतिहास धार्मिक ग्रंथ के बारे में बच्चन परिवार के साथ चर्चा करेंतत्कालीन स्वार्थ हित में नहीं फंसते हुए राष्ट्र हित के काम करता है। *संघ को राजनीति के नजरिए से नहीं देखें। संघ को नहीं समझने के कारण ही लोगों ने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना और प्रतिबंध लगाया। परंतु जब राष्ट्र हित के महत्व का विषय आता है तो संघ हमेशा खड़ा रहता है। 

संघ हमेशा देश हित में खड़ा रहा

चाहे अलगाववाद और आतंकवाद का विषय हो, धारा 370 का विरोध हो, माओवादी हिंसा व अवैध मतांतरण का विरोध हो या चाहे घुसपैठ का विषय हो। संघ हमेशा देश हित में खड़ा रहा। आपातकाल में तो संघ ने पूरी ताकत लगा दी और परिणाम भी दिखा था।   तत्कालीन स्वार्थ हित में नहीं फंसते हुए राष्ट्र हित के काम करता है। संघ को राजनीति के नजरिए से नहीं देखें। संघ को नहीं समझने के कारण ही लोगों ने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना और प्रतिबंध लगाया। परंतु जब राष्ट्र हित के महत्व का विषय आता है तो संघ हमेशा खड़ा रहता है। 



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