Dhanbad। संत एंथोनी चर्च परिसर में मणिपुर के लिए शांति प्रार्थना समारोह का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम फादर ज्ञान प्रकाश टोपनो ने कहा कि आज हम यहां भारी मन से एकत्र हुए हैं। घृणा, हिंसा, जातीय विभाजन जैसी बुराइयों के सोच से दबे हुए मणिपुर के साथ हम अपनी एकजुटता दिखाने और उनके लिए प्रार्थना करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। हम यह अच्छी तरह जानते हैं कि प्रार्थना में अतुलनीय शक्ति है। प्रार्थना के बल पर हम बड़े से बड़ा काम कर सकते हैं। विशेषकर अपने भाई बहनों को हम यह भरोसा दिला सकते हैं कि आप अकेले नहीं हैं, हम आपके साथ हैं। शारीरिक रूप से नहीं लेकिन ईश्वरीय योजना के द्वारा प्रार्थना के साथ हम आपके साथ हैं। ज्यों भी कि हम आप अपने आप को इस टूटे हुए संसार में पाते हैं फिर भी हम सभी जब कभी भी एक साथ मिलकर प्रार्थना करते हैं और दृढ़ आशा रखते हैं कि ईश्वर हमारी प्रार्थना को सुनेंगे और उसका निश्चय उत्तर देंगे हमें हमारा उत्तर अवश्य मिलता है। इसके तहत वहां उपस्थित सभी लोगों ने मणिपुर के लोगों के लिए तथा वहां शांति स्थापित होने के लिए प्रार्थना की एवं 'प्रभुवर मुझे अपनी शांति का प्रचारक बना' गीत के बोल गाए। तत्पश्चात प्रार्थना सभा में विशेष रूप से आमंत्रित भूली डिनोबिली से आए फादर माइकल फर्नांडिस ने लोगों को संबोधित करते हुए अपनी बातों की शुरुआत एक अत्यंत खूबसूरत कविता से की जिसे सामाजिक परिवेश की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए खूबसूरती से बुना गया था। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मणिपुर में स्थित आर्चबिशप फादर थॉमस लुपुंग,येसु समाजी फादर हेक्टेयर डिसूजा तथा फादर वालटर फर्नांडिस विभिन्न तरीकों से वहां जूझ रहे लोगों को अपनी सहायता प्रदान कर रहे हैं।उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम बाहरी बातों को केवल सुनकर अपना निर्णय ना लें अथवा किसी परिणाम पर ना पहुंचे बल्कि इस बात के लिए प्रार्थना करें कि लोग असली कारण को जाने तथा उनमें जागरूकता फैले। पवित्र बाइबल के अनुसार हमें किसी भी परिस्थिति में निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि ईश्वर की कृपा निरंतर हम पर बनी रहती है। चाहे दुख हो या सुख हमें निरंतर प्रार्थना में लगे रहना चाहिए। हमें यही प्रार्थना करनी चाहिए कि ईश्वर दंगाइयों को विवेक प्रदान करें, उन्हें अच्छाई और बुराई, न्याय और अन्याय, हिंसा और अहिंसा का भेद पता लगे। साथ ही इस दुख के समय ईश्वर उन पीड़ितों को यह विश्वास दिलाएं कि ईश्वर उनके साथ है और उन्हें यह दुख सहने की कृपा प्रदान करें। आज नहीं तो कल उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान गाकर किया गया।

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