धनबाद: मिशनरी चैरिटी मेमको मोड़ के द्वारा प्रभु यीशु के जन्मदिवस को लेकर गुरुवार 21 दिसंबर को गाजे बाजे के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। जो धनबाद के मेमको मोड, रानीबांध, सिटी सेंटर, एलसी रोड, रणधीर वर्मा चौक होते हुए स्टील गेट से वापस मिशनरी चैरिटी कार्यालय पहुंची। शोभा यात्रा में ईसाई समुदाय के सैकड़ो लोग मौजूद थे। शोभा यात्रा में मौजूद फादर थोम क्रिसतियान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रभु यीशु मसीह दुनिया के ऐसे पहले और आखिरी व्यक्ति रहे हैं जिन्होंने कभी किसी स्कूल में नहीं पढा़या लेकिन फिर भी पूरी दुनिया ने उन्हें अपना गुरु माना. उनका कोई दास नहीं था फिर भी लोगों ने उन्हें राजा कहा। उन्हें कूस की मृत्यु दी गई और दफना दिया गया फिर भी वे आज हमारे जीवित प्रभु यीशु मसीह हैं। इस प्रकार हम एक जीवित मसीह की आराधना करते हैं और आज यहां उसी प्रभु के जन्मोत्सव की खुशी को बांटने के लिए एक साथ एकत्रित हुए हैं.फादर ने कहा कि 1950 में 25 दिसंबर के दिन ही मदर टेरेसा ने कलकत्ता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी जो एक रोमन कैथोलिक स्वयंसेवी धार्मिक संगठन है यह संगठन दुनिया के 130 से भी अधिक देशों में विभिन्न मानवीय कार्यों में योगदान दे रहा है।इसकी 5500 से भी अधिक ईसाई मिशनरियों की मंडली है। इसमें शामिल होने के लिए नौ वर्षों की सेवा और परीक्षण के बाद, सारे ईसाई धार्मिक मूल्यों पर खरा उतारकर इस संगठन के विभिन्न कार्यों में अपनी सेवा देने के बाद ही शामिल किया जाता है। इसके सदस्यों को चार संकल्पों पर अडिग रहना होता है जैसे :पवित्रता, दरिद्रता, आज्ञाकारिता और दिल से गरीबों की सेवा में अपना जीवन व्यतीत करना।




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