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एएनएए-टीजी (ANAA-TG) बेंगलुरु चैप्टर 6.0 पुनर्मिलन समारोह भावनात्मक एवं यादगार रहा




बेंगलुरु।ऑल नोबिलियन्स अचीवर्स एसोसिएशन – द ग्लोबल (ANAA-TG) के बेंगलुरु चैप्टर 6.0 का पुनर्मिलन समारोह अत्यंत सफल, भावनात्मक एवं यादगार रहा। इस विशेष अवसर पर डी नोबिली स्कूल्स के पाँच सेवानिवृत्त शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को और भी गौरवान्वित बना दिया। शिक्षकों ने अपने पूर्व विद्यार्थियों द्वारा वर्षों बाद भी उन्हें स्नेह, सम्मान एवं आदरपूर्वक याद किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा सभी को अपना स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं। यह अवसर सभी उपस्थित पूर्व छात्रों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण एवं स्वागत के साथ हुआ। इसके उपरांत डी नोबिली स्कूल की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप सभी पूर्व छात्रों एवं शिक्षकों ने सामूहिक रूप से विद्यालय का स्कूल सॉन्ग तथा प्रातःकालीन प्रार्थना (मॉर्निंग प्रेयर) गाकर अपने छात्र जीवन की मधुर स्मृतियों को पुनः जीवंत कर दिया। डी नोबिली स्कूलों में यह परंपरा वर्षों से विद्यालयीन संस्कृति का अभिन्न अंग रही है।  इसके पश्चात शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। सम्मान समारोह, शिक्षकों के प्रेरणादायी उद्बोधन, पूर्व छात्रों का परिचय, मनोरंजक खेल, संगीत, प्रश्नोत्तरी तथा सामूहिक रात्रिभोज ने पूरे आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। लंबे समय बाद मिले सहपाठियों ने पुरानी यादें ताज़ा कीं और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।इस सफल आयोजन की रूपरेखा एवं संचालन में एएनएए-टीजी के संस्थापक सदस्य मयंक सिंह के साथ शामिया आफताब, सोनल चटर्जी, चिरंजीव भाया, श्रुति सुमन, सुधीर ब्रह्मा, विनता कुमारी एवं अरुणिमा चक्रवर्ती सहित पूरी कोर टीम का विशेष योगदान रहा। सभी सदस्यों के समर्पण, सूक्ष्म योजना एवं उत्कृष्ट टीमवर्क ने कार्यक्रम को भव्य सफलता दिलाई।इस पुनर्मिलन समारोह में वर्ष 1973 से 2020 बैच तक के वरिष्ठ एवं युवा पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित प्रमुख पूर्व छात्रों में किशोर चौधरी, मोरिन मोसेस चतुर्वेदी, तन्वी सिन्हा, साकेत सिन्हा, कौशिक मित्तल, सिद्धार्थ रॉय, दिव्यांशु प्रसाद सौम्या, निखिल कुमार अग्रवाल सहित अनेक अन्य नोबिलियन्स शामिल रहे।यह आयोजन केवल एक मिलन समारोह नहीं था, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, पुरानी मित्रताओं और डी नोबिली परिवार की अटूट एकता का जीवंत उत्सव बन गया। सभी उपस्थित सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया तथा "वंस अ नोबेलियन, ऑलवेज अ नोबेलियन" की भावना को पुनः सशक्त किया।

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