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खादी इंडिया का गाय के गोबर से बना पेंट धनबाद के लोगो को भी लुभाने लगा है, खासियत बाज़ार में उपलब्ध पेंट से काफी सस्ता, सिर्फ चार घंटे में सूखेगा


Dhanbad। गाय के गोबर से बना पेंट... सुन कर कुछ अजीब लगेगा। अब ये हक़ीक़त है खादी इंडिया का प्राकृतिक पेंट खुद एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने लांच किया। धनबाद में भी प्राकृतिक पेंट धीरे - धीरे मार्केट पकड़ने लगा है। मनइटांड़ गोल्ड बिल्डिंग के पास अभिषेक सिंह के प्रोडक्शन यूनिट का प्राकृतिक पेंट  पुराना बाजार से लेकर रांची के बाजारों तक पहुंच रहा है। शहर की नामी-गिरामी 99 बिल्डर भी प्राकृतिक पेंट का प्रयोग कर रहे हैं।

इको फ्रेंडली है खादी का पेंट

खादी के इस पेंट में हैवी मेटल जैसे लेड, पारा, क्रोमियम आर्सेनिक कार्डियम नहीं है। खादी इंडिया के मुताबिक ये पेंट अष्ठ लाभ वाला है यानी इसके आठ फायदे हैं। ये पेंट इको फ्रेंडली, नॉन टॉक्सिक, एंटी बैक्टेरियल, एंटी फंगल, ओडर्लेस, हैवी मेटल फ्री, नेचुरल इंसुलेटर और कॉस्ट इफेक्टिव है।


कितनी है कीमत

गोबर से बने पेंट से सरकार के मुताबिक इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी। फिलहाल इसकी पैकिंग 2 लीटर से लेकर 30 लीटर तक तैयार की जा रही है। वहीं इसकी कीमत भी खादी इंडिया के मुताबिक काफी कम है। एक लीटर डिस्टेम्पर 120/- रुपए है जबकि इमल्शन 270/- रुपए प्रति लीटर है। इसे खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन ने तैयार किया है। गाय के गोबर से बने पेंट दो फ़ॉर्म डिस्टेंपर और प्लास्टिक इमल्शन में हैं। वहीं खादी इंडिया का दावा है की ये पेंट बाज़ार में उपलब्ध पेंट से काफी सस्ता है। इसके सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये सिर्फ चार घंटे में सूखेगा। इसमें जरुरत के हिसाब से रंग भी मिलाया जा सकता है।

भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित है ये पेंट

यह पेंट बीआईएस यानी भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित किया गया है। इसे खादी ग्रामोद्योग की जयपुर की इकाई कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। वहीं खादी के इस पेंट को नेशनल टेस्ट हाउस मुंबई, श्री राम इंस्टीटट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च दिल्ली और नेशनल टेस्ट हाउस गाजियाबाद में टेस्ट किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है की ये मार्केट में पहले से उपलब्ध किसी भी पेंट से कम नहीं है। हर तरह से उस पेंट की टक्कर का है और कम दाम में है। उनके मुताबिक ये पेंट अच्छा विकल्प है और लोग इसे अपनाएंगे। सरकार के मुताबिक अनुमान लगाया है कि किसानों और गौशालाओं को प्रति गाय के गोबर से 30 हजार रुपए की आमदनी होगी। इसे आत्मनिर्भर भारत योजना आगे बढ़ेगी साथ ही गांव से शहर की तरफ पलायन भी रुकेगा।



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